RANCHI
आज जलेस रांची की रचना गोष्ठी कुमार बृजेंद्र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। कुमार बृजेंद्र ने जून में बाबा नागार्जुन की जन्म जयंती के अवसर पर उनकी स्मृति को नमन करते हुए कहा कि आज की परिस्थिति में उनकी प्रतिरोध की कविता टूटते- बिखरते समाज को रास्ता दिखा सकती है.
ज़िला सचिव ने अपने आरंभिक संबोधन में प्रतिकूल परिस्थिति का ज़िक्र करते हुए कहा कि संस्कृति और साहित्य के माध्यम से हम अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे तो समाज को दिशा मिल सकती है.
रचना गोष्ठी में हिंदी,उर्दू के अलावा कुड़ुक,मुंडारी, खड़िया,असुर, संताली,पंजाबी और नागपुरी की कविताओं का पाठ किया गया साथ में हिंदी अनुवाद भी पेश किया गया.
कविता में वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई . और पूंजी और सत्ता के गठजोड़ के कारण आम जीवन किस तरह प्रभावित हो रहा है, उसे भी उजागर करने की कोशिश की गई .. कविता में प्रतिरोध का स्वर मुखर हो रहा था.
इन लोगों ने कविता पाठ किया-
यासमीन लाल
इंकलाब का नारा कब गूँजेगा चौक-चौराहों में,
देश पूछ रहा है सर पर कफ़न बाँधने वालों से।
जिनकी रग-रग में बहता है बलिदानों का इतिहास,
कब बोलोगे अपनी पीढ़ी से, देश पूछ रहा है तुमसे।
सत्यनारायण मुंडा *(मुंडारी कविता)
जिदान जंगि गतिङ जिलिङ गेया,
जिदन होरा गतिङम गोड़ोमन रेदो।
सेसेन डारे संगन-संगिन गेया,
पंनत पति संगञ चांडाङ में।।
सोनी कुमारी खड़िया
आज की दशा देखकर जीवन तड़प रहा है।
सूना पड़ा है आँगन, सूनी हुई है दुनिया,
रोहित केरकेट्टा
घाव जो तुमने दिए, अभी भी हरे-हरे हैं,
टसटसाते दर्द में कुछ सपने ठहरे हैं।
गुदगुदी मुस्कान लिए जी रहा हूँ मैं,
बीते सुख के पल अभी भी कसमसाते हैं।
अनामिका एक्का (खड़िया कविता)
बेरोड्नापे रो मुगम आयपे,
कुलम ए डिया कुलमा मडायकी।
अता भेरें बो’ताय लों दो अवनापे,
खड़िया कुलमकी मुगम आयपे।।
छोटनी असुर
बुरु आया — मेरी महान पहाड़ माँ,
मेरे नंगे तन को तुमने वस्त्र दिए।
भूख में भोजन, प्यास में जल दिया,
अनाथ जीवन को माँ का स्नेह दिया।
“मनीषा कुमारी
एगो बचपन कर जमाना रहे,
जेकर में खुशी कर खजाना रहे।
चाहत त चाँद कर रहे मनवा,
ई दिन त तिरली कर दीवाना रहे।
सरोज झा
मैं चाहता हूँ हिंदी-उर्दू की बोली रहे अपनी ज़ुबान में,
राम, रहीम, रहमान रहें, आरती और अज़ान में।
गीता और कुरान दोनों का सम्मान रहे,
और सदा अमर मेरा हिंदुस्तान रहे।
चन्द्रिका
हमने माँगी जो थोड़ी धूप, कुछ उजाले भी,
कर दिए उसने हमें रातों के हवाले भी।
कैद कर रखी हैं साँसें मेरी तहखानों में,
और चाँदनी की ज़ुबाँ पर पड़े हैं ताले भी।
* सरिता एक्का (कुड़ुख कविता)
निजड़ा मना, निजड़ा मना, आदिवासिर एवदा एम्हय ती बच्चर,
मोखा लगनर एमन लड़ना मना।
तंगआ अधिकार गे अक्कु मला,
तो एका बीरी हुँ मला।।
डॉ विनोद कुमार
जानवरों की चीखें गूँज रही थीं,
और हर एक मनुष्य भयभीत होकर भाग रहा था।
मानो किसी का इंतज़ार कर रहा हो समय,
पर आज तक मैंने उसका नाम नहीं सुना।
कुमार बृजेन्द्र
शोलों में भड़कने लगे हर घर पहाड़ पर,
पहले जहाँ पाँव उठते थे मांदर की थाप पर।
जंगल से नहीं, अब शहर से आते हैं जानवर,
चीखें सुनाई देती हैं अक्सर पहाड़ पर।
* सचिन
मैं उस नीले गुलाब में डूबते सूरज की तस्वीर खोज रहा था,
पर इस शहर में साँस लेने भर की भी जगह नहीं थी।
भीड़ से भरी मेट्रो में सब अपने-अपने अकेलेपन में कैद थे,
और स्क्रीन पर दुनिया के घाव थे—जंगल, युद्ध, भूख और इंसानियत की हार।
इक़बाल दानिश
प्यार में कब से हम बहुत कुछ सहते हैं,
यहाँ लोग दिल की बातें भी कहाँ बाँटते हैं।
न समझाइए हमें खुदा और तक़दीर के मायने,
जो हम पर गुज़रती है, उसे हम ही जानते हैं।
दर्द की दास्ताँ लंबी है बहुत साहब,
हर मुस्कान के पीछे कितने हादसे हैं।
: प्रियंका उरांव
जंगल वाली लड़की, सुबह होते ही
जंगल की ओर जाती
वह लाती है जंगल से खुखड़ी, पुटु
जुडी है वह जंगल पहाड़ो से |
: डॉ. अशरफ़ अली
चाहत-ए-दिल-ओ-जिगर,
बच्चे का कहा मान जा,
हक़-शनासी पहचान जा।
दिल के मामले हैं,
दिमाग़ बरू-ए-कार न ला।
जिधर तू चला, उस तरफ़ मत जा,
राह की दुश्वारी है।
राह की दुश्वारी है,
ऊपर से तारीकी है,
पत्थरीला डगर है,
चलना मगर है
रामदेव बड़ाईक
नाना कहयं नाती ठिना
सुंदर एकन किस्सा
नाना ने कहा नाती के पास एक किस्सा
गुरमीत सिंह मीत
मनकी बात की शोर बड़ा है,
अंधभक्त का जोर बढ़ा है
इसके अलावा शालिनी नायक, समीउल्लाह खान असदकी आदि ने कविता का पाठ किया. वीना श्रीवास्तव,डॉ जमशेद कमर , सुधीर पाल,डॉ विनोद कुमार,कुमार बृजेंद्र ने कविता पर अपनी समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये कविताएं जल जंगल जमीन से जुड़ी हुई है . ये आदिवासियत की पहचान भी कराती हैं ,इसके अलावा इनमें प्रतिरोध के स्वर भी अंगड़ाई ले रहे हैं, व्यवस्था के प्रति रोष भी है.
इस जोश,आक्रामकता ,प्रतिरोध की ज्वाला को मद्धिम मत होने दीजिए.
सभा का संचालन अपराजिता मिश्र ने किया और यास्मीन लाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया .
मुख्य उपस्थिति: अनामिका एक्का ,विक्की मिंज,सौरभ,मो अमान,खालिक अहमद,अरविंद कुमार,देश दीप,सत्यनारायण मुंडा तथा बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी भी गोष्ठी में उपस्थित थे।
