RANCHI
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के झारखंड में भाजपा की सरकार बनाने संबंधी बयान पर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। हिमंता ने कहा कि पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड भाजपा का “अनफिनिश्ड एजेंडा” है और पार्टी अगले चुनाव में यहां सरकार बनाने का प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण झारखंड की जनसंख्या संरचना प्रभावित हो रही है और आदिवासी हितों की रक्षा के लिए भाजपा की सरकार आवश्यक है।
हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन संबंधी कमियों के कारण भाजपा सत्ता तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन अगले चुनाव में पार्टी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेगी। उन्होंने दावा किया कि पूर्वी भारत में झारखंड ही ऐसा प्रमुख राज्य है, जहां भाजपा की सरकार नहीं है और इसलिए पार्टी का विशेष फोकस अब इसी राज्य पर रहेगा।
दीपक बिरुआ बोले- झारखंड कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं
हिमंता के बयान पर झारखंड सरकार के मंत्री दीपक बिरुआ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि झारखंड कोई राजनीतिक प्रयोगशाला या किसी दल का “अधूरा एजेंडा” नहीं, बल्कि वीर सिदो-कान्हू और भगवान बिरसा मुंडा की धरती है, जो अपने अधिकारों की रक्षा करना जानती है।
बिरुआ ने कहा कि भाजपा दो दशक तक राज्य की सत्ता में रही। यदि उस दौरान कथित घुसपैठ हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व केंद्र सरकार के अधीन बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का है, ऐसे में इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डालना उचित नहीं है।
‘जनता 2024 में जवाब दे चुकी‘
दीपक बिरुआ ने अपने पोस्ट में कहा कि भाजपा नफरत की राजनीति के जरिए झारखंड का माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रही है, जबकि हेमंत सोरेन सरकार विकास और जनकल्याण के एजेंडे पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 1932 के खतियान, सरना धर्म कोड, मंईयां सम्मान योजना और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार ने लंबी लकीर खींची है। बिरुआ ने दावा किया कि जनता ऐसे मुद्दों को पहले ही खारिज कर चुकी है और 2024 के विधानसभा चुनाव में भी अपना फैसला सुना चुकी है।
