झारखंडी सिनेमा को नई उड़ान: ‘सेरेंग’ 1 मई को होगी रिलीज, आदिवासी संघर्ष की अनोखी कहानी



Dr. Alam Ara, Assistant professor

झारखंड के सिमडेगा जिले के युवा और प्रतिभाशाली फिल्मकार NPK पुरुषोत्तम एक बार फिर अपनी नई नागपुरी फिल्म सेरेंग” के साथ दर्शकों के बीच आ रहे हैं। इससे पहले वे “बंधा खेत” (2021) और “दहलीज” (2022) जैसी चर्चित फिल्मों से अपनी पहचान बना चुके हैं। उनकी यह नई फिल्म 1 मई 2026 को रिलीज होने जा रही है, जिसे लेकर क्षेत्रीय सिनेमा प्रेमियों में खासा उत्साह है।

संघर्ष, संगीत और पहचान की कहानी

फिल्म “सेरेंग” एक आदिवासी लड़की की कहानी है, जो जीवन के संघर्ष, जिम्मेदारियों और अपनी पहचान के बीच संतुलन बनाते हुए संगीत के प्रति अपने प्रेम को जीवित रखती है।
मुंडारी भाषा में “सेरेंग” का अर्थ “चट्टान” और संथाली में “संगीत” है, इन्हीं दो अर्थों के द्वंद्व के इर्द-गिर्द पूरी कहानी बुनी गई है।

फिल्म में भाई-बहन (माघी और संदीप) के माध्यम से प्रतिरोध और सृजन का गहरा चित्रण किया गया है, जहां एक ओर भाई हथियार उठाता है, वहीं बहन संगीत और प्रेम के जरिए अपनी राह चुनती है। यह द्वंद्व केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज के बदलते स्वरूप का प्रतीक बन जाता है।

लोक संस्कृति, समरसता और मजबूत संदेश

“सेरेंग” की सबसे बड़ी ताकत उसकी लोक संस्कृति, नागपुरी भाषा की मिठास और झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता है। फिल्म में पारंपरिक संगीत, स्थानीय भाषाएं, और जनजातीय जीवन के रंग बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।

इसके साथ ही फिल्म सामाजिक समरसता, सहिया प्रथा और मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश देती है। जातीय और धार्मिक विभाजन के दौर में फिल्म का संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण इसे खास बनाता है।

फिल्म हिंसा, विस्थापन और सामाजिक संघर्ष जैसे गंभीर मुद्दों को उठाती है, लेकिन जवाब देने के बजाय दर्शकों को सोचने के लिए मजबूर करती है।

संगीत और कलाकारों की खास भूमिका

फिल्म का संगीत “साउंड ऑफ झारखंड” द्वारा दिया गया है, जो इसकी आत्मा माना जा रहा है। “नैना रे नैना”, “दिसुम-दिसुम”, “हो छैला रे” जैसे गीत पहले से ही चर्चा में हैं।

मुख्य भूमिकाओं में श्वेता विश्वकर्मा, विवेक नायक और नितेश कच्छप नजर आएंगे। इसके अलावा पद्म मधु मंसूरी, पद्म मुकुंद नायक सहित कई दिग्गज कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।

कुल मिलाकर “सेरेंग” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि झारखंड की मिट्टी, संस्कृति, संघर्ष और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है—जो स्थानीय होते हुए भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता रखती है।

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