W बंगाल में ‘फिश पॉलिटिक्स’ परवान पर, मोदी के मूढ़ी के बाद चंपाई और अनुराग ने खाई मछली करी

RANCHI

पश्चिम बंगाल में इन दिनों “फिश पॉलिटिक्स” चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता Anurag Thakur का मच्छी करी खाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के उस बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा के सत्ता में आने पर राज्य में मछली खाने पर रोक लग सकती है।

वायरल तस्वीरों से बढ़ी सियासी गर्मी

इस विवाद की शुरुआत तब और तेज हुई जब Narendra Modi की झारग्राम से झालमुड़ी खाते हुए तस्वीर वायरल हुई। इसके बाद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री Champai Soren की मछली-भात खाते हुए तस्वीर भी चर्चा में आ गई।

इन तस्वीरों को ममता बनर्जी के उस दावे से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा की सरकार बनने पर मांस, मछली और अंडे पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

भाजपा का पलटवार: खाने की आज़ादी पर कोई रोक नहीं

वायरल वीडियो के बाद Anurag Thakur ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा शासित राज्यों में कहीं भी लोगों की खाने-पीने, बोलने या पूजा करने की आज़ादी पर कोई रोक नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा 16 राज्यों में और NDA 20 राज्यों में सत्ता में है, लेकिन कहीं भी इस तरह के प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं।

ममता पर आरोप: डर और भ्रम फैलाने की राजनीति

Anurag Thakur ने Mamata Banerjee पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास 15 साल के शासन की कोई ठोस उपलब्धि नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से वह जनता के बीच डर, भ्रम और अफवाह फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही हैं।

चुनावी माहौल में फूड पॉलिटिक्सका असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि बंगाल जैसे राज्य में, जहां मछली-भात सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, वहां खाने-पीने के मुद्दे पर राजनीति तेजी से भावनात्मक रूप ले सकती है। ऐसे में “फिश पॉलिटिक्स” आने वाले समय में चुनावी बहस का अहम मुद्दा बन सकता है, जहां भोजन की स्वतंत्रता बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का टकराव और तेज होने की संभावना है।

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