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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) केंद्रीय स्तर पर किसी सोसायटी या ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत नहीं है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, इसे ‘Body of Individuals’ (BOI) या ‘Association of Persons’ (AOP) यानी व्यक्तियों का समूह माना गया है।खातों का ऑडिट (Auditing of Accounts)संघ का अपना अलग पैन कार्ड (PAN Card) है।संघ को मिलने वाला धन (मुख्यतः ‘गुरुदक्षिणा’) और अन्य वित्तीय लेन-देन का हर साल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा विधिवत ऑडिट किया जाता है।कानून के अनुसार, ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण (Income Tax Return) नियमित रूप से आयकर विभाग को प्रस्तुत किए जाते हैं।कर छूट का आधार
(Principle of Mutuality) कलम 11 या 12A की जगह संघ को आयकर से मिलने वाली छूट ‘परस्परता के सिद्धांत’ (Principle of Mutuality) पर आधारित है। कानून कहता है: “कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह स्वयं से लाभ नहीं कमा सकता।”
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि संघ एक ‘Body of Individuals’ है। शाखा में आने वाले स्वयंसेवक ही इसके सदस्य हैं। जब ये सदस्य संस्थान का खर्च चलाने के लिए स्वेच्छा से धन (गुरुदक्षिणा) देते हैं, तो यह बाहरी व्यावसायिक आय नहीं मानी जाती।न्यायालयीन निर्णय (Judicial Precedents)1994 में पटना उच्च न्यायालय (CIT vs Rashtriya Swayamsevak Sangh) के एक महत्वपूर्ण फैसले और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया कि: “स्वयंसेवकों से मिलने वाली गुरुदक्षिणा परस्परता के सिद्धांत पर आधारित है।
