RANCHI
झारखंड के पेयजल विभाग से जुड़े कथित 23 करोड़ रुपये के घोटाला मामले की जांच के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले के आरोपी संतोष कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दो अधिकारियों पर मारपीट, धमकी देने और अवैध रूप से बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत दर्ज होने के बाद रांची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अब मामला केवल आर्थिक अपराध की जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
एयरपोर्ट थाना में दर्ज प्राथमिकी में ED के सहायक निदेशक प्रतीक कुमार और एक अन्य अधिकारी शुभम को नामजद किया गया है। संतोष कुमार का आरोप है कि पूछताछ के लिए बुलाए जाने के दौरान उन पर आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। शिकायत के अनुसार विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और बाद में पूरे मामले को छिपाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी दावा किया है कि घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था।
ED कार्यालय पहुंची पुलिस, CCTV फुटेज जब्त
मामला दर्ज होने के बाद गुरुवार को रांची पुलिस की एक विशेष टीम ED कार्यालय पहुंची। सदर डीएसपी, एयरपोर्ट थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों ने कार्यालय परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ली। पुलिस ने संबंधित अधिकारियों से पूछताछ भी की और घटना से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
ED ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर ED ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि संतोष कुमार पहले से घोटाले के मामले में आरोपी हैं और पूछताछ के दौरान उन्होंने खुद ही कांच के जग से अपने सिर पर वार कर लिया था। ED का दावा है कि घटना के तुरंत बाद उनका इलाज कराया गया था और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड एजेंसी के पास मौजूद है। एजेंसी के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में किसी गंभीर चोट की पुष्टि भी नहीं हुई है।
CCTV, मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेज होंगे अहम
मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ED अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की है। फिलहाल पुलिस और ED के अलग-अलग दावों के बीच जांच का केंद्र CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य बन गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और वास्तविक घटनाक्रम क्या था।
