बिहार में नई सड़क परियोजनाओं के लिए ‘लैंड पूलिंग’, ज़मीन को डेवेलप कर किसानों को लौटाएगी सरकार

Patna

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति देने की तैयारी

बिहार सरकार राज्य में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए अपनी पुरानी ‘लैंड पूलिंग’ रणनीति पर नए सिरे से विचार कर रही है। यह पहल “सात निश्चय-3” कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं के मद्देनज़र की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक मुआवज़ा-आधारित ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली अड़चनों और विवादों को कम करने के लिए इस मॉडल को फिर से लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

क्या है लैंड पूलिंग मॉडल और कैसे करेगा काम

प्रस्तावित ‘लैंड पूलिंग मॉडल’ के तहत सरकार सीधे ज़मीन अधिग्रहण नहीं करेगी। इसके बजाय, ज़मीन मालिक अपनी ज़मीन का एक हिस्सा विकास के लिए देंगे, जबकि शेष भूमि पर उनका मालिकाना हक बरकरार रहेगा।

सड़क निर्माण विभाग प्रोजेक्ट के अलाइनमेंट के साथ-साथ ज़मीन का विकास करेगा, जिससे उस क्षेत्र की बाज़ार कीमत बढ़ने की संभावना है। विकसित ज़मीन का हिस्सा बाद में मालिकों को वापस कर दिया जाएगा, जिससे उन्हें दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

ज़मीन मालिकों को मिलेगा दोहरा फायदा

इस व्यवस्था में ज़मीन मालिकों को केवल मुआवज़ा ही नहीं, बल्कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण बढ़ी हुई ज़मीन की कीमत का लाभ भी मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि एकमुश्त मुआवज़े के मुकाबले यह मॉडल लंबे समय में अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।

साथ ही, इस्तेमाल की गई ज़मीन के हिस्से के लिए आर्थिक मुआवज़ा भी दिया जाएगा, जिससे मालिकों को तत्काल और भविष्य—दोनों तरह का लाभ मिल सके।

एक्सप्रेसवे और नए कॉरिडोर पर फोकस, HAM मॉडल से फंडिंग

राज्य सरकार विभिन्न ज़िलों में कई एक्सप्रेसवे और नए सड़क कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है, जिनके लिए बड़ी मात्रा में ज़मीन की आवश्यकता होगी। ऐसे में ‘लैंड पूलिंग’ को एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

फंडिंग के लिए ‘हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल’ (HAM) को भी अपनाया जा रहा है, जिसमें परियोजना लागत का 40% सरकार वहन करती है, जबकि 60% निवेश निजी डेवलपर करते हैं और बाद में राजस्व के माध्यम से वसूली करते हैं।

पुराने अनुभव से सीख, नए ढांचे में वापसी

अधिकारियों ने बताया कि पहले इस मॉडल को लागू करने की कोशिशें अपेक्षित सफलता नहीं पा सकी थीं। हालांकि, अब संशोधित ढांचे और आधुनिक फंडिंग मॉडल्स के साथ इसे दोबारा लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

सरकार को उम्मीद है कि इस नए दृष्टिकोण से न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में तेजी आएगी, बल्कि ज़मीन मालिकों के हितों की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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