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बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होती दिख रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री को लेकर अब स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। बताया जा रहा है कि निशांत कुमार राजनीति में उतरने से पहले अपने पिता से करीब 20 दिनों तक विशेष ‘पॉलिटिकल ट्रेनिंग’ लेंगे, जिसमें वे प्रशासनिक और संगठनात्मक कामकाज को करीब से समझेंगे।

सूत्रों के अनुसार निशांत कुमार ने राजनीति में आने से पहले काफी तैयारी की है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 200 से अधिक महत्वपूर्ण भाषणों का अध्ययन किया है, ताकि उनकी राजनीतिक शैली और सोच को समझ सकें। इसके अलावा उन्होंने समाजवादी विचारधारा को समझने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया और जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन और विचारों पर आधारित कई किताबें भी पढ़ी हैं।
‘यात्रा’ से शुरू होगी सियासी पारी
जानकारी के मुताबिक निशांत कुमार अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी एक बड़ी बिहार यात्रा से करेंगे। यह वही रणनीति है, जिसने कभी नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान को मजबूत किया था। माना जा रहा है कि राज्य के अलग-अलग जिलों में जाकर वे लोगों से संवाद करेंगे और संगठन को मजबूत करने का प्रयास करेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी लंबी राजनीतिक पारी के अंतिम चरण में यात्राओं के जरिए जनता से संवाद कर रहे हैं, वहीं उनके बेटे निशांत भी अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत इसी रास्ते से करने जा रहे हैं।
दो युवा विधायकों को मिली जिम्मेदारी
निशांत कुमार की प्रस्तावित यात्रा को सफल बनाने के लिए जेडीयू ने दो युवा विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी दी है। ये दोनों विधायक पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इनमें से एक विधायक मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा से आते हैं और निशांत कुमार की ही जाति से संबंध रखते हैं। जबकि दूसरे विधायक एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं और भूमिहार समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे तय करें कि निशांत किन जिलों में जाएंगे, किन मुद्दों पर जनता से संवाद करेंगे और यात्रा की रणनीति क्या होगी।
समाजवादी विचारधारा पर जोर
निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश जेडीयू के लिए पीढ़ी परिवर्तन (Generational Shift) के रूप में देखा जा रहा है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पृष्ठभूमि रखने वाले निशांत का समाजवादी विचारधारा की ओर झुकाव यह संकेत देता है कि वे पार्टी की मूल विचारधारा को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
पार्टी नेताओं का मानना है कि निशांत के सक्रिय होने से जेडीयू के युवा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा आएगी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बिहार की राजनीति में नई धुरी
निशांत कुमार की सक्रियता के साथ ही बिहार की भावी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भविष्य में उन्हें पार्टी संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
हाल ही में 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता लेने के बाद अब सबकी नजरें उनकी प्रस्तावित बिहार यात्रा पर टिकी हैं। यह यात्रा तय करेगी कि जनता उन्हें एक नए राजनीतिक चेहरे के रूप में किस तरह स्वीकार करती है और बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका कितनी तेजी से मजबूत होती है।
