माघ मेले से स्नान बिना लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, अखिलेश बोले-BJP के अहंकार से परंपरा को ठेस पहुंची

Prayagraj

प्रयागराज के माघ मेले से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना संगम स्नान किए वापस लौट गए। मौनी अमावस्या के अवसर पर कथित तौर पर प्रशासन द्वारा स्नान से रोके जाने के बाद उन्होंने मेला क्षेत्र में धरना दिया था। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन उनसे माफी मांगे और उन्हें विधिवत स्नान के लिए ले जाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

माघ मेला से प्रस्थान से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रयागराज की पवित्र धरती से वह अत्यंत भारी मन और मानसिक पीड़ा के साथ लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगम स्नान आत्मिक शांति का माध्यम है, लेकिन जो घटनाक्रम यहां घटित हुआ, उसने उनके मन को इतना व्यथित कर दिया कि वह बिना स्नान किए लौटने को विवश हो गए।

इस घटना पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ‘अत्यंत अनिष्टकारी घटना’ करार देते हुए कहा कि भाजपा के दंभ और अहंकार ने सनातन परंपरा को ठेस पहुंचाई है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता का अहंकार त्याग देते, तो स्वयं शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक संगम स्नान करा सकते थे।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि संतों का अपमान कर कोई भी सत्ता सुखी नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि संतों का मन दुखी करना सत्ता के अंत का संकेत है और आज हर सनातनी इस घटना से आहत है।

गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। अत्यधिक भीड़ के चलते प्रशासन ने उन्हें पालकी से उतरकर स्नान के लिए जाने को कहा, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद प्रशासन और शंकराचार्य पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और अंततः वह बिना स्नान किए माघ मेले से वापस लौट गए।

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