नारायण मूर्ति का 72 घंटे काम का फार्मूला, चीन में बैन तो भारत में क्यों कर रहे वकालत

19th November 2025

GUNJESH

इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति फिर से मैदान में उतरे हैं—और इस बार भी वही पुराना जादुई फार्मूला लेकर: काम करो, और काम करो, इतना काम करो कि काम ही आपकी जाति-धर्म-परिवार-सोशल लाइफ सब कुछ बन जाए। उनके मुताबिक भारत को चीन पकड़ना है, तो हफ्ते में 72 घंटे काम करना ही पड़ेगा। अब भले ही दुनिया प्रोडक्टिविटी, मानसिक स्वास्थ्य और वर्क-लाइफ बैलेंस पर रिसर्च कर-करके थक चुकी हो, लेकिन मूर्ति साहब के लिए तो विकास का रास्ता सिर्फ एक ही है—घंटे बढ़ाओ, देश बढ़ाओ।

समस्या यह है कि जिस ‘चीन मॉडल’—9-9-6—का उदाहरण वह दे रहे हैं, वह खुद चीन की सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में गैरकानूनी घोषित कर दिया था।

लेकिन शायद यह सूचना मूर्ति साहब तक कभी पहुंची ही नहीं। या फिर पहुंची भी होगी, तो उन्होंने सोचा होगा—“चीन में तो बैन है, लेकिन भारत में क्यों नहीं चलेगा?  जैसे यह कोई वर्क मॉडल नहीं कप सीरप हो.

9-9-6 मॉडल की खूबसूरती देखिए—सुबह 9 से रात 9 तक, हफ्ते में 6 दिन। कुल 72 घंटे। यह सच है कि एक जमाना था जब चीन की टेक कंपनियों में यह मॉडल ऐसे चलता था जैसे आर्थिक क्रांति का गुप्त मंत्र हो। अलीबाबा, टेनसेंट, हुवावे—सब जगह यही नियम लागू था।

हुवावे के संस्थापक रेन झेंगफेई ने एक बयान में कहा था कि “जो 9-9-6 नहीं करना चाहते, वे कंपनी छोड़ सकते हैं।” स्टाफ पर एक ही सैलरी में डबल काम करने का दबाब बनाया जाता था।

इससे स्टार्टअप को महंगे इंजीनियरों की बड़ी टीम रखने की जरूरत नहीं पड़ती थी। लगातार ओवरटाइम से कर्मचारियों में डिप्रेशन, चिंता, नींद की कमी आम हो गई।

कई युवाओं की अचानक मौत हुई। बढ़ते तनाव को देखते हुए साल 2021 में चीन की सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध घोषित कर दिया। फिर भी कई कंपनियां चुपके से इसे फॉलो करती रही हैं। ध्यान दीजिएगा, चुपके से यानी चोरी से. अब जो काम चीन में चोरी से हो रहा है. अपने मूर्ति जी चाहते हैं कि देश में खुल्लम खुल्ला हो।

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