भाजपा सरकारों की बढ़ी टेंशन! Supreme Court की हरी झंडी के बाद छात्रों पर FIR वापसी का बढ़ा दबाव


NEW DELHI

नीट पेपर लीक आंदोलन से जुड़े छात्र-प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को कहा कि अब केंद्र सरकार और भाजपा/एनडीए शासित राज्यों को 25 जुलाई को छात्रों से किए गए वादे का सम्मान करते हुए प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर तत्काल वापस लेनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसके पूर्व आदेश में प्रयुक्त क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स (आपराधिक पृष्ठभूमि)” शब्द का अर्थ केवल ऐसे लोगों से है, जिन पर हत्या, दुष्कर्म जैसे गंभीर और जघन्य अपराधों के आरोप हों। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के अनुरूप राज्य सरकारें अन्य छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने या बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं।

केंद्र ने कोर्ट में दोहराया अपना रुख

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह नीट पेपर लीक आंदोलन और 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित संसद मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ मुकदमे आगे नहीं बढ़ाना चाहती, बशर्ते उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला न हो। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

CJP बोली- अब वादा निभाने की बारी सरकार की

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण से सरकार की प्रतिबद्धता को लेकर बनी सभी शंकाएं दूर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अब केंद्र और भाजपा/एनडीए शासित राज्यों को छात्रों से किए गए आश्वासन का तत्काल पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह युवाओं की एक और बड़ी जीत है। अदालत ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकारें छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ले सकती हैं और केवल हत्या, दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के आरोपियों पर ही आगे कार्रवाई का सवाल उठता है।

युवाओं के साथ खड़े रहने का दावा

सौरव दास ने कहा कि आंदोलन के पहले दिन से ही उनकी पार्टी छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी रही है। संगठन ने जरूरतमंद छात्रों को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय मदद और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि अब जबकि छात्रों ने अपना वादा निभाया है, सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने आश्वासन को बिना देरी लागू करे।

महिला प्रदर्शनकारियों को भी कानूनी सहायता

पार्टी की प्रवक्ता रत्ना सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत भी एफआईआर समाप्त की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि संगठन प्रदर्शनकारी रुचिका के परिवार के संपर्क में है और जिन महिला प्रदर्शनकारियों ने उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, उन्हें भी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

CJP ने कहा कि वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा अदालत में दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखेगी और यदि जरूरत पड़ी तो आगे भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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