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बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से कायम राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती देते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह उनकी चुनावी राजनीति की पहली बड़ी जीत मानी जा रही है और जन सुराज के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मतगणना की शुरुआत से ही प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए रहे और अंततः भाजपा उम्मीदवार को करीब 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। वर्ष 1995 से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर यह परिणाम बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
यह उपचुनाव इसलिए भी अहम था क्योंकि यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। ऐसे में इस सीट पर हार भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है। पार्टी ने परिणाम स्वीकार करते हुए हार के कारणों की समीक्षा करने की बात कही है।
जन सुराज को मिला नया राजनीतिक संबल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत ने जन सुराज को बिहार की राजनीति में नई ताकत दी है। पिछले विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद यह जीत प्रशांत किशोर के लिए बड़ी राजनीतिक वापसी के रूप में देखी जा रही है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ा है।
बदले राजनीतिक समीकरणों के संकेत
बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम यह संकेत देता है कि बिहार की राजनीति में मतदाता नए विकल्पों को भी अवसर देने के लिए तैयार हैं। भाजपा के मजबूत गढ़ में मिली यह जीत आने वाले चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों के लिए रणनीति पर नए सिरे से विचार करने का संकेत मानी जा रही है।
