RANIGANJ
रानीगंज के पंजाबी मोड़ स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के सर्विस रोड किनारे स्थापित महान साहित्यकार, इतिहासकार और मार्क्सवादी चिंतक राहुल सांकृत्यायन की नौ फुट ऊंची पूर्णाकृति प्रतिमा रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई। प्रतिमा स्थल पर सुरक्षा घेरा और चबूतरा क्षतिग्रस्त मिला, जबकि कुछ टूटे हुए टुकड़े घटनास्थल पर बिखरे पाए गए। घटना के बाद रानीगंज और पूरे कोयलांचल में व्यापक आक्रोश है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार देर रात अज्ञात लोगों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर वहां से हटा दिया। आरोप है कि वारदात से पहले आसपास के सीसीटीवी कैमरों को निष्क्रिय किया गया और सड़क की बिजली आपूर्ति भी बाधित कर दी गई, ताकि अंधेरे का लाभ उठाया जा सके। घटना को सुनियोजित बताते हुए लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
राहुल सांकृत्यायन की यह प्रतिमा वर्ष 1993 में उनकी जन्मशती के अवसर पर गठित समिति की पहल पर स्थापित की गई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के चौड़ीकरण के दौरान इसे वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित किया गया था। बताया जाता है कि यह देश में राहुल सांकृत्यायन की पहली पूर्णाकृति प्रतिमा थी। वर्षों से यहां उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, विचार गोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
घटना के विरोध में पश्चिम बंग लोकतांत्रिक लेखक-शिल्पी संघ समेत विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक और प्रगतिशील संगठनों ने रानीगंज थाना और पंजाबी मोड़ पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दी। संगठनों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनर्स्थापित करने की मांग की।
पश्चिम बर्धमान जिला संयुक्त सचिव अनुप मित्रा ने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की घटना नहीं, बल्कि देश की प्रगतिशील सांस्कृतिक विरासत पर हमला है। मंगलवार शाम पंजाबी मोड़ पर विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन और पथसभा भी की। सभा में साहित्यकारों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, पूर्व विधायक रूनू दत्ता, नाटककार नीलांजन घटक समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन हिंदी साहित्य के महान रचनाकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन और प्रगतिशील विचारधारा के महत्वपूर्ण स्तंभ थे। ‘वोल्गा से गंगा’ और ‘भागो नहीं, दुनिया को बदलो’ जैसी उनकी कृतियां आज भी समाज को वैचारिक दिशा देती हैं।
वर्ष 1993 में दिवंगत श्रमिक नेता विवेक चौधरी के नेतृत्व में रानीगंज में राहुल सांकृत्यायन जन्मशती समिति का गठन किया गया था। इसी दौरान शहर की एक प्रमुख सड़क का नाम ‘राहुल सांकृत्यायन मार्ग’ रखा गया था। फिलहाल प्रतिमा गायब होने की घटना को लेकर रानीगंज और कोयलांचल में रोष है। संगठनों ने प्रशासन से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और प्रतिमा की जल्द पुनर्स्थापना की मांग की है।
नोट- इस खबर के साथ AI जेनेरेटेड इमेज लगी है।
