लोकपाल की बड़ी कार्रवाई: 14,450 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार मामले की जांच का रास्ता साफ

विशद कुमार

उल्लेखनीय है कि नागरिक-संचालित जवाबदेही की एक शक्तिशाली मिसाल पेश करते हुए, भारत के लोकपाल द्वारा डायरी नंबर 1982026 पर कार्रवाई तेज करने का एक मामला प्रकाश में आया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी व जनहित याचिकाकर्ता देवव्रत कुमार साहनी द्वारा दायर विस्तृत शिकायत को संज्ञान में लेते हुए भारत के लोकपाल ने उक्त शिकायत को आगे बढ़ाते हुए CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) का रिपोर्ट नंबर 20 ऑफ 2025 के आधार पर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में कथित ₹14,450 करोड़ की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

मतलब साफ है कि जनहित याचिकाकर्ता देवव्रत कुमार साहनी द्वारा दायर शिकायत पर भारत के लोकपाल ने संज्ञान लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की है। जो एक साकारात्मक कदम है, जिससे जवाबदेही की उम्मीद सहित PMKVY में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई से इन्साफ की नई उम्मीद जगी है।

बताना जरूरी हो जाता है कि कभी-कभी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि एक आम नागरिक की दृढ़ता से सामने आती है। यह  मामला इसी बात का संकेत है।

लोकपाल के समक्ष प्रस्तुत डायरी नंबर 1982026 के तहत दर्ज इस जनहित याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट संख्या 20 ऑफ 2025 का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई है।

शिकायत को आगे बढ़ाए जाने के बाद अब मामले में विस्तृत जांच की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

शिकायत में क्या कहा गया है?

जनहित याचिका में PMKVY 2.0 और 3.0 के क्रियान्वयन में कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। जिसमें प्रमुख रूप से—

– बड़ी संख्या में कथित घोस्ट लाभार्थियों और अमान्य या डमी बैंक खातों का उपयोग।

– हजारों डुप्लिकेट बैंक खाते और दोहराई गई तस्वीरों के माध्यम से संभावित डेटा फ्रॉड।

– बिहार के कई जिलों, जैसे बांका, मधेपुरा और शेखपुरा में कथित रूप से बंद प्रशिक्षण केंद्रों को भी भुगतान जारी रहने के आरोप।

– प्रमाणित अभ्यर्थियों की तुलना में कम प्लेसमेंट दर, जिससे योजना के वास्तविक प्रभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

– आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के सीमित अनुपालन और निरीक्षण व्यवस्था में कथित गंभीर खामियां।

– फंड उपयोग, राशि सरेंडर और प्रशासनिक खर्च से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोप।

शिकायत में केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, NSDC, बिहार सरकार, BSDM तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। साथ ही CBI और CVC से समयबद्ध जांच, डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, SIP/SIDH पोर्टल के फॉरेंसिक ऑडिट तथा सार्वजनिक धन की वसूली जैसे कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

देवव्रत कुमार साहनी का कहना है कि, “यह केवल एक ऑडिट रिपोर्ट का मामला नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के विश्वास से जुड़ा प्रश्न है जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सार्वजनिक धन और युवाओं के भविष्य—दोनों के साथ गंभीर अन्याय होगा। लोकपाल द्वारा संज्ञान लिया जाना जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

देवव्रत कुमार साहनी ने बताया कि “हमने इससे पहले 23 फरवरी 2026 और 8 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिकारियों को विस्तृत शिकायतें भेजी थीं। अपेक्षित कार्रवाई न होने पर उन्होंने लोकपाल का दरवाजा खटखटाया।”

अब लोकपाल द्वारा शिकायत को आगे बढ़ाए जाने से मामले ने नई गंभीरता हासिल कर ली है।

आगे क्या हो सकता है?

यदि लोकपाल प्रारंभिक जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर पाता है, तो आगे की प्रक्रिया में—

– प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry)।

– संबंधित विभागों से जवाब तलब।

– डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश।

– तथा आवश्यकता पड़ने पर CBI जैसी एजेंसियों को  जांच सौंपने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेंगे।

बता दें कि यह मामला केवल एक योजना या एक विभाग तक सीमित नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से एक सामान्य नागरिक भी सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकता है।

अब सभी की निगाहें लोकपाल की आगामी कार्रवाई पर हैं, क्योंकि यह जांच न केवल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना बल्कि देश की अन्य कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा भी तय कर सकती है।

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