ओडिशा के शिक्षकों को राहत, TET पास करने की समयसीमा अब 2028 तक, SC निर्देशों के बाद फैसला



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ओडिशा में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की गई है, खासकर उन शिक्षकों के लिए जिन्होंने अब तक टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास नहीं किया है। राज्य के स्कूल और जन शिक्षा (S&ME) विभाग ने TET परीक्षा पास करने की समय-सीमा में विस्तार करते हुए इसे दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया है। इसके तहत अब जिन शिक्षकों ने ओडिशा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (OTET) अभी तक उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें 31 अगस्त 2028 तक यह योग्यता हासिल करनी होगी।

विभाग की ओर से एलिमेंट्री एजुकेशन के निदेशक को जारी किए गए आधिकारिक निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में सेवा दे रहे सभी शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक योग्यता पूरी करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और शिक्षा के न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

समय-सीमा बढ़ाए जाने से हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें बिना तत्काल दबाव के परीक्षा की तैयारी करने और उसे पास करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद लिया गया है, जिसमें देशभर में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET योग्यता को अनिवार्य किया गया था। संशोधित समय-सीमा का उद्देश्य अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना और साथ ही उन शिक्षकों को व्यावहारिक राहत देना है, जो अभी तक आवश्यक योग्यता पूरी नहीं कर पाए हैं।

सरकारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के एक रिव्यू प्रोसिडिंग का हवाला देते हुए बताया गया है कि ‘अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट और अन्य’ मामले में दिए गए निर्णय के पैरा 217 के अनुसार समय-सीमा में बदलाव किया गया है। पहले यह अवधि दो साल निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। इसी के तहत अब TET योग्यता प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31.08.2027 से बढ़ाकर 31.08.2028 कर दी गई है।

S&ME विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और हितधारकों को निर्देश दिया है कि वे इस निर्णय की जानकारी अपने-अपने स्तर पर साझा करें और सुप्रीम कोर्ट के 01.09.2025 के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि 29.05.2026 को समीक्षा याचिकाओं पर दिए गए आदेश के अनुरूप इन प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

विभाग ने इस पूरे मामले को अत्यंत प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का समयबद्ध और सख्त अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहे।

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