अमेरिका के नक्शे में गायब जम्मू-कश्मीर, PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बताने पर भड़का सियासी तूफान

CENTRAL DESK

अमेरिका के एक आधिकारिक सैन्य मंच पर भारत के नक्शे को कथित रूप से गलत तरीके से दिखाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि अमेरिकी पैसिफिक कमांड द्वारा इस्तेमाल किए गए नक्शे में जम्मू-कश्मीर को भारत के मानचित्र से बाहर रखा गया, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में दर्शाया गया। इस घटनाक्रम ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत के दावे वाले क्षेत्र को लेकर विवाद

नक्शे में जम्मू-कश्मीर और पीओके की प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आलोचकों का कहना है कि भारत संसद में कई बार स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर और पीओके दोनों उसके अभिन्न अंग हैं। ऐसे में किसी विदेशी संस्थान द्वारा अलग तस्वीर पेश करना भारत के आधिकारिक रुख के विपरीत माना जा रहा है।

कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी का दावा करने वाले देशों द्वारा बार-बार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जो भारत के हितों के खिलाफ दिखाई देते हैं। खेड़ा ने सवाल किया कि जब मित्र राष्ट्र ही भारत की संवेदनशील सीमाओं को लेकर ऐसी स्थिति अपनाएं तो इसे कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।

क्या भारत की आपत्तियों को मिल रहा है पर्याप्त महत्व?

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि वैश्विक साझेदारी और मजबूत कूटनीतिक संबंधों के दावों के बीच यदि भारत के मानचित्र को लेकर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह चिंता का विषय है। विपक्ष ने सरकार से इस मामले पर स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया देने की मांग की है।

नाम बदलने के फैसले पर भी उठे सवाल

विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने “इंडो-पैसिफिक कमांड” का नाम बदलकर फिर से “यूएस पैसिफिक कमांड” करने की घोषणा की है। कांग्रेस ने इसे भी भारत की घटती कूटनीतिक अहमियत से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि एक समय जिस क्षेत्रीय रणनीति में भारत का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया था, अब उसे हटाया जाना कई संकेत देता है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस कथित नक्शा विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा और संप्रभुता से जुड़े मामलों में भारत हमेशा संवेदनशील रहा है, इसलिए अमेरिका के इस कथित कदम पर आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

नक्शे का यह विवाद केवल एक मानचित्र की गलती भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत के क्षेत्रीय दावों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी कारण यह मामला अब राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *