Sahibganj
साहिबगंज जिले में शेरशाहबादी समुदाय द्वारा केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। समुदाय के लोगों का कहना है कि वर्षों से वे अपने अधिकार और पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं, जिनमें कांग्रेस और झामुमो शामिल हैं, ने शेरशाहबादी समाज को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल कराने और ओबीसी प्रमाण पत्र दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
समुदाय के लोगों ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में शेरशाहबादी समाज को केंद्रीय ओबीसी प्रमाण पत्र का लाभ पहले से मिल रहा है, जबकि झारखंड के साहिबगंज जिले के लोग अब भी इस अधिकार से वंचित हैं। इसे लेकर समाज के भीतर गहरी नाराजगी और भेदभाव की भावना बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक प्रमाण पत्र का मामला नहीं, बल्कि उनकी पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।

सात दिनों से जारी है शांतिपूर्ण आंदोलन
शेरशाहबादी समुदाय के लोगों ने बताया कि पिछले सात दिनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और लगातार प्रशासन तथा सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद अब तक न तो प्रशासनिक स्तर पर कोई सकारात्मक पहल हुई और न ही स्थानीय स्तर पर उनकी आवाज को गंभीरता से उठाया गया।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने मीडिया से भी अपील की है कि उनकी मांगों और आंदोलन को प्रमुखता से उठाया जाए ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे और लंबे समय से लंबित इस मुद्दे का समाधान हो सके। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
पहचान और अधिकार की लड़ाई बता रहे आंदोलनकारी
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि शेरशाहबादी समाज लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल होना उनके लिए बेहद जरूरी है, जिससे युवाओं को शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का लाभ मिल सके। समुदाय ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और शेरशाहबादी समाज को वह अधिकार मिलेगा, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही है।

