20 साल बाद केस का अंत, सभी आरोपी हुए बरी
MUMBAI
करीब दो दशक पुराने 2006 मालेगांव धमाका मामले में कोर्ट ने सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया है। इस विस्फोट में 37 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले भी इस केस के अन्य आरोपी बरी हो चुके थे, जिसके बाद अब इस मामले में कोई भी आरोपी ट्रायल का सामना नहीं कर रहा है। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है।
हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी को माना आधार
चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की बेंच ने आरोपियों की अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले में ठोस सबूतों की कमी है। न तो कोई चश्मदीद गवाह सामने आया और न ही ऐसा कोई ठोस साक्ष्य मिला, जो आरोपियों को सीधे तौर पर घटना से जोड़ सके।
जांच एजेंसियों के बदलने से केस में आया मोड़
8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में शब-ए-बारात के दौरान कब्रिस्तान में धमाके हुए थे। शुरुआत में महाराष्ट्र ATS ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में 2007 में जांच CBI को सौंप दी गई। इसके बाद केस में बड़ा मोड़ तब आया जब NIA ने जांच अपने हाथ में लेकर चार नए आरोपियों को गिरफ्तार किया और अलग साजिश का दावा किया।
इकबालिया बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट पर उठे सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि अभियोजन का मामला कमजोर है, क्योंकि कथित इकबालिया बयान पहले ही अदालत में खारिज किए जा चुके हैं। साथ ही, जिस स्थान पर विस्फोटक तैयार किए जाने का दावा किया गया था, वहां से RDX के कोई निशान नहीं मिले। इससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
पीड़ित परिवारों में निराशा, न्याय पर उठे सवाल
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों में गहरी निराशा है। कई परिवारों का कहना है कि इतने बड़े आतंकी हमले में किसी को भी दोषी न ठहराया जाना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह मामला देश के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक होने के बावजूद आज तक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया, जिससे न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होता दिख रहा है।
