रंगमंच सूना, सुर खामोश: अनुदान के इंतजार में ठहरी झारखंड की सांस्कृतिक धड़कन


कला के पंख थमे, मंच अधूरे: वित्तीय देरी से सिमटते उत्सव और महोत्सव



DHANBAD

झारखंड में सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं और कलाकारों के सामने इस समय बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। राज्य सरकार के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के करीब आने के बावजूद अब तक किसी भी संस्था को अनुदान की राशि नहीं मिल सकी है। इससे कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों में निराशा का माहौल है।

अनुदान में देरी से प्रभावित सांस्कृतिक गतिविधियां

झारखंड स्वैच्छिक सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता अनुदान नियमावली 2019 के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए थे। राज्यभर की कई संस्थाओं ने समय पर आवेदन भी किया, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इस अनुदान के सहारे ही संस्थाएं कार्यशालाएं, महोत्सव और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती हैं। अब राशि नहीं मिलने से इन आयोजनों पर संकट मंडराने लगा है।

कलाकारों में बढ़ी उदासीनता और चिंता

अनुदान में देरी के कारण कलाकारों के बीच निराशा और उदासीनता बढ़ रही है। कई सांस्कृतिक समूहों ने अपने कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं या उन्हें रद्द करने की स्थिति में पहुंच गए हैं। इससे न केवल कलाकारों की आजीविका प्रभावित हो रही है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है।

सरकार से शीघ्र भुगतान की मांग

कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने राज्य सरकार से अपील की है कि अनुदान राशि जल्द जारी की जाए। उनका कहना है कि समय पर सहायता मिलने से राज्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा, कला और कलाकारों का संरक्षण संभव होगा और समाज में सांस्कृतिक जागरूकता भी मजबूत होगी।

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