US हमले में मारे गए 3 भारतीय नाविकों में एक का शव पहुंचा घर, G7 में मोदी की चिंता पर ट्रंप ने कहा, “ऐसा होता रहता है”

Central desk

ओमान के तट पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मारे गए तीन भारतीय नाविकों में से अब तक केवल एक का शव ही उसके घर पहुंच पाया है, जबकि दो अन्य नाविकों के परिवार अब भी अपने बेटों की अंतिम विदाई का इंतजार कर रहे हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का सवाल उठाया, लेकिन ट्रंप का जवाब चर्चा का विषय बन गया। ट्रंप ने समुद्री मार्गों पर होने वाली ऐसी घटनाओं को “मुश्किल पेशे का हिस्सा” बताते हुए कहा, “ऐसा तो हमेशा से होता आया है।”

आठ दिन बाद गांव पहुंचा शिवानंद का शव

अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले तीन भारतीय नाविकों में से शिवानंद चौरसिया का शव आठ दिन बाद उनके पैतृक गांव सुरौली पहुंचा। मस्कट से दिल्ली और फिर गोरखपुर लाए गए शव के गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में मातम छा गया। माता-पिता, पत्नी और परिजन बदहवास होकर रोने लगे। वहीं, दो अन्य मृत भारतीय नाविकों के शव अब तक उनके परिवारों तक नहीं पहुंच पाए हैं, जिससे उनके परिजनों की बेचैनी और बढ़ गई है।

मुआवजा, नौकरी और शहीद का दर्जा मांग रहा परिवार

शिवानंद के परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार से एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और मृतक को शहीद का दर्जा देने की मांग की। मांगें पूरी होने का आश्वासन मिलने तक उन्होंने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। करीब तीन घंटे तक शव एम्बुलेंस में ही रखा रहा। बाद में जिला प्रशासन द्वारा ज्ञापन लेने और कार्रवाई का भरोसा देने के बाद परिवार आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार हुआ।

मोदी ने उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

G7 सम्मेलन से इतर हुई द्विपक्षीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप से कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य समेत दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर हजारों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मोदी ने उम्मीद जताई कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के साथ नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

ट्रंप के बयान पर उठ रहे सवाल

मोदी की चिंता के जवाब में ट्रंप ने कहा कि समुद्री परिवहन का काम बेहद कठिन है और इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। उनका “ऐसा तो हमेशा से होता आया है” वाला बयान अब चर्चा और आलोचना का विषय बन गया है, क्योंकि यह उस समय आया जब भारतीय परिवार अपने प्रियजनों के शव तक मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

हमले के बाद भारत ने जताया था कड़ा विरोध

10 जून को ओमान के तट के पास पलाऊ के झंडे वाले टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया था। घटना के बाद भारत ने अमेरिकी मिशन के अधिकारियों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर भारत की नाराजगी जाहिर की थी। इसके बावजूद अमेरिका ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे प्रतिबंधों के अनुपालन से जुड़ा कदम बताया।

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