SUSHIL KUMAR
RANCHI
5 अगस्त, 2026 को देश के जुझारू पत्रकार संगठनों के परिसंघ ने समाचार एजेंसी UNI मसले पर इस महीने के तीसरे सप्ताह में आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में कर्मचारियों एवं पूर्व कर्मचारियों के बकाये राशि का पूर्ण भुगतान, पीएफ के मामले, कंपनी को कथित हेराफेरी के जरिए कभी मालिकाना में शामिल रहे स्टेट्समैन को ओने पौने में हस्तांतरित करने, यूएनआई में निवेश किए गए राशि की वैधता, हाल में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर खाली कराए गए सरकारी जमीन पर UNI के मौजूदा प्रबंधन द्वारा किए गए अवैध निर्माण आदि मुद्दों पर गहन चर्चा होगी एवं आंदोलन की अग्रिम रूप रेखा तैयार की जाएगी।
सार्क जर्नलिस्ट्स फोरम के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपके सुशील भारती, पत्रकार संगठनों के परिसंघ के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र शर्मा और ‘सेव UNI मूवमेंट’ की लीगल सेल के सीनियर सदस्य और दिल्ली हाई कोर्ट के वकील दीपके अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि “बैठक में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों के बकाया का पूरा भुगतान, प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़े मामले, UNI का ‘द स्टेट्समैन’ (जो कभी कंपनी के मालिकों में से एक था) को बहुत कम कीमत पर कथित तौर पर धोखाधड़ी से ट्रांसफर करना, UNI में निवेश किए गए फंड की वैधता, और UNI के मौजूदा मैनेजमेंट द्वारा सरकारी ज़मीन पर किया गया अवैध निर्माण, (जिसे हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद खाली कराया गया था) जैसे मुद्दे शामिल होंगे। भविष्य के आंदोलन के लिए एक रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।”
अवसर पर दीपके भारती ने कहा कि “संगठन इन संपूर्ण गतिविधियों पर अरसे से नजर रख रहा था, उम्मीद की जा रही थी, कि सभी चीजें संस्थान एवं के कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों हितों में कानूनी दायरे में पारदर्शी तरीके से होगी, लेकिन चंद चाटुकार कर्मचारियों की मिली भगत से ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पैसा किस श्रोत से आया? यह अहम है इसलिए इन तमाम स्थितियों की सीबीआई से जांच जरूरी है।” उन्होंने आगे कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से तुरंत जांच की मांग की जाएगी और ज़रूरत पड़ने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।”
डॉ. शर्मा ने कहा कि “UNI को नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐसी दम तोड़ती कंपनी के हवाले किया गया है, जो कभी कंपनी के शेयर होल्डरों में शामिल रहा है। उसने शेयर होल्डर की हैसियत से कभी UNI की समस्याओं की और ध्यान नहीं दिया, लेकिन हालात बदतर होने पर बेशकीमती भूखण्डों एवं अन्य संपत्तियों की लालच में रिसीवर के जरिए UNI का सर्वेसर्वा बन गया।”
वकील दीपके चौधरी ने कहा कि “मौजूदा प्रबंधन के खिलाफ हम सभी कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहे है। बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई है। इन तमाम स्थितियों की सीबीआई से जांच करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।” उन्होंने कहा कि देश की “जनता की वजह से हजारों करोड़ रुपये की दिल्ली में लुटियन जोन स्थित 9 रफी मार्ग की सरकारी जमीन को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर इन माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जा सका है।”
(लेखक का परिचय – लेखक वरिष्ट पत्रकार हैं और सामयिक विषय़ों पर निरंत लिखते रहते हैं। उनको पत्रकारिता के कई सम्मान से नवाजा गया है)

