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विशद कुमार
आइसा राज्य कमेटी द्वारा आज 3 जुलाई को महेन्द्र सिंह भवन, राज्य कार्यालय भाकपा माले, रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आइसा नेताओं द्वारा कहा गया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 14 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरना तथा पिछले 6 दिनों से पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के साथ चल रही भूख हड़ताल में शामिल आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा और आंदोलनरत सभी साथियों के संघर्ष के प्रति हम अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हैं। देशभर के छात्र-युवा बेहतर भविष्य, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम इस आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हैं।
झारखंड में फीस वृद्धि, शिक्षा के निजीकरण और एनईपी-2020 को लागू करने की दिशा में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी पुनर्गठन संकल्प के तहत लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम का हम पुरजोर विरोध करते हैं। यह व्यवस्था सेल्फ-फाइनेंस मॉडल, ऋण आधारित शिक्षा और विषय चयन की स्वतंत्रता को सीमित करती है। इससे ग्रामीण, महिला, आदिवासी, दलित, पिछड़े तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुंच और कठिन होगी तथा ड्रॉपआउट बढ़ेगा। यह सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर कर छात्रों को महंगे निजी संस्थानों की ओर धकेलने वाली छात्र-विरोधी नीति है। इसलिए क्लस्टर सिस्टम को तत्काल वापस लिया जाए।
देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य संकट में डाल दिया है। अनेक भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं विवादों में रही हैं। हाल के वर्षों में NEET और CUET जैसी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे, जबकि JEE Advanced 2026 में डेटा एक्सपोज़र (Data Exposure) का मामला सामने आया, जिसमें गलत क्लाउड कॉन्फ़िगरेशन के कारण कुछ अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड और एडमिट कार्ड सुलभ हो गए थे। झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। JSSC CGL, JPSC-JET, JSSC JE, कांस्टेबल तथा JAC की 10वीं बोर्ड परीक्षा सहित कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक अथवा गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। हमारी मांग है कि पेपर लीक पर कठोर कानून लागू हो, दोषियों को कड़ी सजा मिले तथा पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
झारखंड के लाखों अभ्यर्थी वर्षों से सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अनेक भर्तियां अब भी लंबित हैं। JSSC JE, LDC/क्लर्क, सहायक आचार्य, माध्यमिक आचार्य, उत्पाद सिपाही, कारापाल, पुलिस कांस्टेबल, JPSC तथा JTET सहित कई भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों से अटकी हुई हैं। राज्य सरकार नियमित भर्ती एवं शैक्षणिक कैलेंडर जारी करने में विफल रही है। वहीं केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में भी लाखों पद रिक्त हैं। हमारी मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें सभी रिक्त पदों पर समयबद्ध एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करें और नियमित भर्ती कैलेंडर जारी करें।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), जो देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती है, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने में लगातार विफल रही है। पेपर लीक, अनियमितताओं और अव्यवस्था ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है। जवाबदेही तय हो, दोषियों पर कार्रवाई हो तथा NTA के स्थान पर अधिक पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
उपरोक्त सभी मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन के क्रम में 6 जुलाई को रांची में छात्र-युवाओं का विशाल मार्च एवं राजभवन घेराव आयोजित किया जाएगा। इस प्रदर्शन के माध्यम से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, क्लस्टर सिस्टम की समाप्ति, पेपर लीक पर रोक, लंबित भर्तियों को अविलंब शुरू करने तथा छात्र-विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य के सभी छात्र-युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिकों से अपील है कि वे 6 जुलाई के इस विशाल प्रदर्शन में शामिल होकर शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की लड़ाई को मजबूत बनाएं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ राष्ट्रीय ओबीसी छात्र मोर्च के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश चौधरी, SFI से फैज़ान खान, आइसा के जिला अध्यक्ष विजय कुमार,सचिव संजना मेहता, सोनाली केवट सहित अन्य लोग ने संबोधित किया। मौके पर मौजूद सत्यप्रकाश कुमार,रोहित कुमार।
