VISHAD KUMAR
खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill, 2026) को संसद द्वारा 13 अगस्त 2026 को पारित कर दिया गया है। इसे लोकसभा ने 12 अगस्त 2026 को और राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी।
यह विधेयक खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों, उपकरों (Cess) एवं अन्य शुल्कों को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन सीमित करके एक समान एवं पूर्वानुमेय खनिज कराधान ढाँचा स्थापित करने का प्रयास करता है।
धारा 9D राज्यों को खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर कर अथवा शुल्क लगाने से प्रतिबंधित करती है। इसमें खनिज की मात्रा, मूल्य अथवा रॉयल्टी के आधार पर लगाए जाने वाले कर भी शामिल हैं, जब तक कि वे केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अंतर्गत अनुमत न हों।
मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया मामले में सर्वोच्च न्यायालय के 9 न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने वर्ष 2024 के खनिज अधिकार संबंधी निर्णय दिया कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति है। साथ ही, न्यायालय ने संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने के राज्यों के अधिकार को भी मान्यता दी।
खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद देश में कई सामाजिक जन संगठनों व राजनीतिक दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
इसी आलोक में सोमवार 17 अगस्त को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर वामदलों, झारखंड जनाधिकार महासभा और अन्य कई जन संगठनों द्वारा खनिज और खनन संशोधन (विकास एवं विनियमन) लोकसभा में पारित विधेयक के खिलाफ प्रतिरोध सभा में सैकड़ों लोगों ने शामिल होकर झारखंड पर घातक आर्थिक हमला बताते हुए का प्रतिरोध मार्च किया।
मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि यह विधेयक झारखंड राज्य के संसाधनों की लूट ही नहीं झारखंड की जनता, यहां के आदिवासियों द्वारा संरक्षित संसाधनों, यहां की जल, जंगल, जमीन, हवा पर कब्जा कर लिए जाने जैसा है, झारखंड के स्वशासन को भी खत्म करने की साजिश है, यह विधेयक पूरे झारखंडीयत पर हमला हैं, झारखंड की हमेशा से केंद्र की भाजपा सरकार ने और भाजपा की राज्य सरकारों ने सिर्फ लूटने का काम किया हैं। मोदी सरकार का सरासर विद्वेष दिखाई पड़ता है। मोदी सरकार इस विधेयक को तुरंत वापस ले अन्यथा झारखंड की जनता को मजबूरन राज्य से खनिज ढुलाई ठप्प करेगी।
मार्च में कहा गया कि झारखंड के तमाम भाजपा मंत्री, सांसद और विधायक झारखंड की जनता को भाजपा की गद्दारी का जवाब दें। झारखंड की जनता के साथ हुए इस धोखे की जवाबदेही ले। झारखंड की जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्र की सरकार पर विधेयक वापसी का दवाब बनाए या भाजपा के सारे सांसद और विधेयक इस्तीफा दें। इस विधेयक के खिलाफ भाकपा, माकपा, भाकपा-माले, एस यू सी आई सी, झारखंड जनाधिकार सभा एवं अन्य जनसंगठन, द्वारा आज के इस प्रतिरोध दिवस पर आगे और बड़े आंदोलन करने की चेतावनी के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया गया।
प्रतिरोध दिवस में सीपीआई के राज्य सचिव महेंद्र पाठक, भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त, सीपीएम के जिला सचिव प्रफुल्ल लिंडा, एस यू सी आई सी के मिंटू पासवान, झारखंड जनाधिकार महासभा के सिराज दत्ता, भाकपा माले के केंद्रीय कमेटी सदस्य शुभेंदु सेन, आदिवासी संघर्ष मोर्चा के सुदामा खलखो, आइसा के राज्य अध्यक्ष विजय कुमार, एपवा की एती तिर्की प्रतीक, अनंत प्रसाद गुप्ता, दिलीप कुमार, सोहन महतो, खुशबू कुमारी, शमशुल आलम, अनंत कुमार, गीता तिर्की, सपना गाड़ी, सुषमा गाड़ी, विभा पुष्पा, नंदिता भट्टाचार्य, चांदों तिर्की, समर सिन्हा सहित सैकड़ों साथी मौजूद थे।
