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कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला, 11 ज़िलों में शुरू होगा काम
पटना में हुई कैबिनेट बैठक में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 11 ज़िलों में सैटेलाइट टाउनशिप के लिए “कोर एरिया” विकसित करने की योजना को मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इससे ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान होगी और किसानों को उनकी ज़मीन का बेहतर मूल्य मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में उन इलाकों को चुना जाएगा जहां अभी तक कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है और ज़मीन मुख्य रूप से कृषि उपयोग में है। इन क्षेत्रों को “ग्रीन बेल्ट” के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे योजनाबद्ध तरीके से विकास संभव हो सके।
लैंड पूलिंग मॉडल से किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
इस योजना में लैंड पूलिंग मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें किसानों की बिखरी हुई ज़मीन को एक साथ जोड़कर विकसित किया जाएगा। इसके बाद विकसित प्लॉट का 55% हिस्सा वापस ज़मीन मालिकों को दिया जाएगा।
सरकार ने यह भी तय किया है कि:
- 3% ज़मीन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित होगी
- 5% हिस्सा ग्रीन स्पेस (पार्क, खुले क्षेत्र) के लिए रखा जाएगा
- 15% हिस्सा भविष्य की ज़रूरतों के लिए प्राधिकरण के पास रहेगा
इस मॉडल से किसानों को सड़क, बिजली, पानी और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं से लैस विकसित ज़मीन मिलेगी, जिससे उनकी संपत्ति की कीमत कई गुना बढ़ने की संभावना है।
पटना और सोनपुर बनेंगे प्रमुख विकास केंद्र
सरकार ने बताया कि सबसे बड़ा “स्पेशल एरिया” पटना में चिन्हित किया गया है, जो 81,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है। वहीं सोनपुर में करीब 2,000 एकड़ में मुख्य विकास क्षेत्र तय किया गया है, जो इस तरह का अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
इन टाउनशिप को आर्थिक हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर रहेगा खास फोकस
प्रस्तावित टाउनशिप में चौड़ी सड़कें, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही पार्क और खेल मैदान जैसी सार्वजनिक सुविधाएं भी बनाई जाएंगी।
सरकार की योजना है कि इन टाउनशिप को राष्ट्रीय राजमार्ग और रिंग रोड से जोड़ा जाए। इसके अलावा सोनपुर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और सुल्तानगंज के पास नए हवाई अड्डे के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।
सुनियोजित शहरीकरण के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
सरकार का मानना है कि अभी जिन कृषि ज़मीनों की कीमत कम है, वे टाउनशिप बनने के बाद काफी महंगी हो जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ शहरीकरण को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि ग्रामीण ज़मीन मालिकों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है।
यह पहल बिहार में योजनाबद्ध विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो भविष्य में राज्य के आर्थिक ढांचे को नई मजबूती दे सकती है।
