टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर संसद में शोर, रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग बंद को बताया धांधली

New delhi

सांसद राघव चड्डा ने संसद में प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए टेलीकॉम कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि रिचार्ज की वैधता खत्म होते ही कंपनियां इनकमिंग कॉल तक बंद कर देती हैं, जो सीधे-सीधे उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ मनमानी है।

सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी ग्राहक का रिचार्ज खत्म हो जाता है तो आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल भी बंद कर देना पूरी तरह अनुचित है। इसके कारण कोई भी व्यक्ति उस उपभोक्ता से संपर्क नहीं कर पाता और न ही उसके फोन पर ओटीपी जैसे जरूरी संदेश पहुंच पाते हैं।

उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में यह व्यवस्था लोगों को असहाय बना सकती है। इसलिए कम से कम एक साल तक उपभोक्ताओं की इनकमिंग कॉल चालू रहनी चाहिए, ताकि आम नागरिक का “राइट टू कम्युनिकेशन” प्रभावित न हो।

इसके साथ ही उन्होंने 28 दिन के रिचार्ज प्लान को भी उपभोक्ताओं के साथ धोखा बताया। उनका कहना था कि एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन की वैधता वाले प्लान के कारण ग्राहकों को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि रिचार्ज प्लान की वैधता कैलेंडर महीने यानी 30 या 31 दिन के हिसाब से होनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।

राघव चड्ढा ने कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन कोई लग्जरी नहीं बल्कि आम नागरिक की बुनियादी जरूरत बन चुका है, इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए।

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