आदिवासी भोजन परंपरा को गोवा में नया जीवन, वर्कशॉप के जरिये जनजातीय खानपानऔर संस्कृति को मिल रही ताकत

Central Desk

गोवा के चोराओ द्वीप पर स्थित पारंपरिक कुलागर में आयोजित एक विशेष सामुदायिक रसोई वर्कशॉप ने जनजातीय खाद्य विरासत को नए सिरे से सामने रखा। 24 नवंबर को हेरिटेज फर्स्ट गोवा की पहल पर हुई इस वर्कशॉप की मेजबानी इतिहासकार और क्यूरेटर अमरीन शेख ने की, जहां भोजन केवल पकाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्मृति, परंपरा और अनुभव का माध्यम बन गया।

लकड़ी के चूल्हे पर बनता खाना, नारियल, हल्दी और गुड़ की खुशबू, और पत्थर के पारंपरिक औजार—इस माहौल ने प्रतिभागियों को आधुनिक रसोई से अलग एक जीवंत परंपरा से जोड़ा। शहरी पेशेवरों, यात्रियों और घरेलू रसोइयों ने मिलकर पारंपरिक तरीकों से भोजन तैयार किया, जिससे सामूहिक श्रम और साझी जिम्मेदारी की भावना उभरी।

अमरीन शेख ने कहा कि गोवा के आदिवासी समुदायों के भोजन को अक्सर ‘वैकल्पिक’ या ‘पिछड़ा’ मान लिया जाता है, जबकि वास्तव में यह भोजन पर्यावरण-संतुलन, स्वास्थ्य और टिकाऊ जीवनशैली का उदाहरण है। इसी सोच के साथ इस वर्कशॉप को डिजाइन किया गया, ताकि जनजातीय भोजन को उसकी सही पहचान मिल सके।

यह आयोजन चोराओ द्वीप के किसान मच्छिंद्रनाथ अर्जुन कौठणकर, जिन्हें सभी काका कहते हैं, के कुलागर में हुआ। उनका परिवार पांच पीढ़ियों से इस भूमि और पारंपरिक ज्ञान को सहेजता आ रहा है। काका ने प्रतिभागियों को पारंपरिक पौधों, खेती की पद्धतियों और स्थानीय ज्ञान से परिचित कराया, जिससे भोजन और प्रकृति के गहरे संबंध को समझने का अवसर मिला।

वर्कशॉप पूरी तरह प्रैक्टिकल रही। प्रतिभागियों ने अदोली और रोगडो जैसे पारंपरिक औजारों से नारियल और मसाले पीसे। मेन्यू में खटखटे जैसी पारंपरिक सब्जी और कसाई नामक औषधीय हर्बल ड्रिंक शामिल थी, जो स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं से जुड़ी है।

खास आकर्षण तब बना, जब काका की पत्नी ने पारंपरिक पीसने की तकनीक दिखाई। इससे प्रतिभागियों को रोजमर्रा के श्रम और अनुभव की अहमियत का एहसास हुआ। शाम के समय सभी ने साथ बैठकर वही भोजन किया, जिसे उन्होंने मिलकर तैयार किया था।

अमरीन शेख के अनुसार, भोजन लोगों के बीच की दूरी मिटाता है और कहानी को सीधे अनुभव में बदल देता है। प्रतिभागियों ने इसे आत्मीय, उपचार जैसा और सामुदायिक जुड़ाव से भरा अनुभव बताया। काका ने कहा कि भोजन संस्कृति साझा करने से लोग जाति, धर्म और पहचान से ऊपर उठकर एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

यह वर्कशॉप सिर्फ रेसिपी सिखाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने यह दिखाया कि विरासत रोजमर्रा के साझा अनुभवों से जिंदा रहती है, जहां स्वाद, परंपरा और समुदाय एक साथ आगे बढ़ते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *