‘स्कूल ठीक करो’ कॉकरोचों की इस आवाज को दबाया नहीं जा सकता, अब्दुल के पिता की मौत से उठे बड़े सवाल

TANWEER AHMED

CJP के आंदोलन के इतिहास में 15 अगस्त 2026 का दिन हमेशा याद रखा जाएगा, क्योंकि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत में ही CJP आंदोलन ने अपना एक मजबूत साथी के पिता को खो दिया है। वेस्ट बंगाल, बाँकुड़ा के इंदास थाना क्षेत्र के करिशुंडा गाँव के  मोहम्मद मफीक साहब की मौत उस हमले में हुई, जिसमें उनके बेटे अब्दुल हफीज, CJP के बंगाल संयोजक और ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया था। अब्दुल हफीज ने CJP के अभियान के तहत सरकारी प्राथमिक स्कूल की खराब हालत को सामने लाने के लिए उस आंदोलन का हिस्सा बने और सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया और वीडियो बनाया।  स्कूल के प्रिंसिपल ने इसकी शिकायत इलाके के बीजेपी लीडर्स सह गुंडों को दें दी। बीजेपी के गुंडों ने अब्दुल हफ़िज़ के घर पर धार धार हथियारों, रॉड आदि से लैस होकर कर हमला दिया। अब्दुल हफीज को बचाने में उनके पिता मोहम्मद मफीक साहब  गंभीर रूप से घायल हुए और इलाज के दौरान 15 अगस्त को उनकी मौत हो गई। अब्दुल हफ़िज़ को भी घायल हुए वह बच गएँ। अब्दुल हफ़िज़ के पिता मोहम्मद मफीक साहब को CJP आंदोलन का पहला मुस्लिम शहीद कहना गलत नहीं होगा। बल्कि यह इस आंदोलन के इतिहास की एक बेहद महत्वपूर्ण और दर्दनाक सच्चाई के रूप में याद किया जाएगा। अब्दुल हफ़िज़ का क्या गुनाह था? क्या अपने इलाके के स्कूल के बदहाली को ठीक करने की मांग नाजायज़ है? क्या स्कूल में बच्चों के लिए महत्वपूर्ण और ज़रूरी सुविधाएं की मांग करना ग़लत है? क्या स्कूल में बच्चियों के लिए अलग से शौचालय की मांग करना ग़लत है? क्या स्कूल में साफ सफाई और उच्च क्वालिटी की शिक्षा की मांग गलत थी? अब्दुल हाफ़िज़ को सिर्फ इन्हीं कारणों से जान से मारने की कोशिश की गई और उनकी जगह उनके पिता की शहादत हो गई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन में अब्दुल हफीज ने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। वह आंदोलन कामयाब हुआ और CJP की मांगों को लेकर देशभर में चर्चा हुई। जब जंतर मंतर के आंदोलन के दौरान CJP से जुड़े किसी व्यक्ति की जान नहीं गई। लेकिन जब CJP ने ‘स्कूल ठीक करो’ जैसे बुनियादी और जनहित के मुद्दे पर आंदोलन शुरू किया, तो शुरुआत में ही एक परिवार को सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

एक पिता की जान चली गई। एक बेटे ने अपने पिता को खो दिया। और CJP के इतिहास में एक मुस्लिम का नाम पहले शहीद के रूप में दर्ज हो गया। मोहम्मद हफ़िज़ ने अपने पिता के जान के बदले किसी भी तरह के मुआवजे लेने से इनकार करते हुए कहा की ” मेरे पिता की जान स्कूल ठीक करो अभियान के आंदोलन के कारण हुई है, उनके नाम पर एक बेहतरीन स्कूल बने यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इतिहास गवाह है भारत के आंदोलनों और बदलाव की लड़ाइयों का इतिहास देखें तो गरीब, कमजोर और आम लोगों की कुर्बानियाँ हमेशा इस इतिहास का हिस्सा रही हैं। 1857 की जंग से लेकर आज तक, देश और समाज में बदलाव की लड़ाई में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी अपनी जान और सब कुछ कुर्बान किया है। आज मोहम्मद मफीक साहब की कुर्बानी भी उसी सिलसिले की एक नई कड़ी बन गई है।

CJP आंदोलन का पहला शहीद मोहम्मद मफीक साहब।

एक मुस्लिम पिता, जिसने खुद आंदोलन नहीं छोड़ा, लेकिन अपने बेटे के संघर्ष की कीमत अपनी जान देकर चुकाई उनकी कुर्बानी CJP के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।

अब्दुल हफ़िज़ के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए CJP के नेशनल प्रवक्ता आशुतोष रांका ने उनके घर जाकर उनसे मुलाक़ात की उनका सान्त्वना दिया, हौसला बढ़ाया उनके परिवार को न्याय मिले इसकी आवाज़ बुलंद की यह एक सकारात्मक और सरहानीय कदम है। इस कदम से बीजेपी के गुंडों का हसला पस्त और अब्दुल हफ़िज़ जैसे कोक्रोचों का हौसला बुलंद होगा। मुझे उम्मीद है CJP की यह लड़ाई अपने मंजिल में पहुंचने तक जारी रहेगा।

(लेखक का परिचय: तनवीर अहमद, प्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम ने एक बड़ी लकीर खींची है। वे रांची में रहते हैं)

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