कोलकाता एयरपोर्ट की मस्जिद बंद, सुरक्षा या सियासत? TMC ने BJP पर लगाए दबाव बनाने के आरोप



KOLKATA

नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परिसर स्थित 130 साल से अधिक पुरानी बांकरा मस्जिद में प्रवेश बंद किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सुरक्षा के नाम पर मस्जिद को हटाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और रनवे विस्तार के लिए जरूरी है।

TMC बोली- लोग डरे हुए हैं

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सुरक्षा का हवाला देकर मस्जिद को हटाने के लिए जबरदस्ती कर रही है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़ा कोई भी प्रशासनिक फैसला स्थानीय मुस्लिम समुदाय से बातचीत के बाद ही लिया जाना चाहिए। रॉय ने कहा कि इलाके के लोग डरे हुए हैं और यदि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए।

BJP ने सुरक्षा और विकास का दिया तर्क

भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम एयरपोर्ट सुरक्षा और रनवे विस्तार के लिए आवश्यक है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि वर्षों से मस्जिद के कारण रनवे विस्तार का काम प्रभावित था और पिछली सरकारें तुष्टिकरण की राजनीति के कारण फैसला नहीं ले सकीं। उन्होंने कहा कि मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा।

भाजपा नेता केया घोष ने कहा कि एयरपोर्ट के बेहद करीब लोगों का पहुंचना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है। उनके अनुसार, सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय लिया है और स्थानीय इमाम भी इस पर सहमत हैं।

शनिवार से प्रवेश पर रोक

शनिवार से बांकरा मस्जिद में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। आधिकारिक तौर पर इसकी वजह भारी बारिश से मस्जिद तक जाने वाली सड़क का क्षतिग्रस्त होना बताया गया। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी ने केवल आधार कार्ड के आधार पर लोगों को प्रवेश देने की व्यवस्था पर भी चिंता जताई थी।

मस्जिद समिति ने बातचीत की मांग की

बांकरा मस्जिद समिति के अध्यक्ष मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि मस्जिद को लेकर किसी भी निर्णय से पहले दारुल उलूम देवबंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद से राय ली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस मुद्दे का शांतिपूर्ण और धार्मिक तरीके से समाधान चाहता है।

प्रशासन ने नहीं किया अंतिम फैसला

एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मस्जिद में प्रवेश पर लगी रोक अस्थायी है या स्थायी। साथ ही, नई प्रवेश व्यवस्था या मस्जिद के संभावित स्थानांतरण को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

कुछ लोग उन्हें नक्शे में खोजते हैं, लेकिन कोरवा बुजुर्ग उन्हें अपनी यादों में लेकर चलते हैं। किस ढलान के नीचे बारहमासी पानी है, किस गुफा में बारिश से बचा जा सकता है, किस पगडंडी पर हाथियों का झुंड गुजरता है—यह ज्ञान पीढ़ियों से कहानियों और अनुभवों के साथ आगे बढ़ता आया है।”

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