रांची में जुटे भारत-अमेरिका के विशेषज्ञ, Human Trafficking व ड्रग नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई का रोडमैप तैयार

RANCHI

मानव तस्करी, अवैध नेटवर्क और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से रांची में भारत और अमेरिका के विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कोलकाता की अगुवाई में आयोजित “यू.एस.–इंडिया कोऑपरेशन टू काउंटर ट्रैफिकिंग थ्रेट्स” सम्मेलन में सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क केवल एक देश की समस्या नहीं हैं, बल्कि इनसे निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और साझा रणनीति की आवश्यकता है।

सम्मेलन का उद्घाटन अमेरिकी महावाणिज्यदूत कैथी गाइल्स-डियाज़ ने किया। उन्होंने कहा कि तस्करी नेटवर्क समाज के कमजोर वर्गों का शोषण करते हैं, समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा करते हैं। उन्होंने अमेरिका की उस नीति को दोहराया जिसके तहत ऐसे आपराधिक नेटवर्कों को उनके स्रोत पर ही रोकने और ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की चुनौतियों से कोई भी देश अकेले नहीं निपट सकता और भारत-अमेरिका साझेदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जांच तकनीक और सूचना साझाकरण पर जोर

सम्मेलन में अमेरिकी और भारतीय विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों, डेटा आधारित निगरानी प्रणाली और बहु-एजेंसी समन्वय मॉडल पर अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने सीमा पार अपराधों की पहचान और रोकथाम के लिए सूचना साझाकरण को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की। साथ ही उन्नत तकनीक के उपयोग और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

ड्रग्स और ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्क भी चर्चा के केंद्र में

कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हाल के वर्षों में कई ऐसे ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिन पर दुनिया भर में लोगों से अरबों डॉलर की ठगी करने के आरोप हैं। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए चलाए गए अभियानों में बड़ी मात्रा में अवैध ड्रग्स और प्रतिबंधित गोलियां जब्त की गई हैं। सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि मानव तस्करी, साइबर धोखाधड़ी और ड्रग्स तस्करी जैसे अपराध अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और इनके खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर साझा प्रतिबद्धता

सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि मानव तस्करी का सबसे ज्यादा असर गरीब, प्रवासी और सामाजिक रूप से कमजोर समुदायों पर पड़ता है। इसलिए अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत और अमेरिका ने इस दिशा में सहयोग बढ़ाने तथा तस्करी नेटवर्कों को खत्म करने के लिए व्यावहारिक तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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