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पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा एक चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री उदयन गुहा को बुधवार को कूचबिहार में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उस मामले से जुड़ी बताई जा रही है जिसमें भाजपा नेता शुवेंदू अधिकारी के काफिले पर कथित हमले के आरोप लगे थे। करीब 11 महीने पुराने इस विवाद ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है।
अगस्त 2025 की घटना से जुड़ा है मामला
यह मामला अगस्त 2025 में सामने आया था, जब भाजपा नेता और तत्कालीन विपक्ष के नेता शुवेंदू अधिकारी ने आरोप लगाया था कि कूचबिहार में उनके काफिले पर हमला किया गया। अधिकारी ने दावा किया था कि इस मामले में उदयन गुहा की भूमिका की जांच होनी चाहिए, लेकिन पुलिस उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बाद यह विवाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया था।
हाईकोर्ट ने मांगा था पुलिस से जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने पूछा था कि शुवेंदू अधिकारी की शिकायत पर दर्ज FIR और पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई FIR में क्या समानता या अंतर है। कोर्ट यह भी जानना चाहती थी कि अधिकारी की शिकायत किसी व्यापक साजिश की ओर संकेत करती है या नहीं।
FIR को लेकर उठे थे सवाल
शुवेंदू अधिकारी ने अदालत में आरोप लगाया था कि उनकी शिकायत में उदयन गुहा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में शामिल था, लेकिन पुलिस ने उसी आधार पर मामला दर्ज नहीं किया। इसके बजाय जांच पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर आगे बढ़ाई गई, जिसमें TMC नेता का उल्लेख नहीं था। सुनवाई के दौरान जस्टिस अनिरुद्ध रॉय ने पुलिस अधिकारियों से दोनों FIR के बीच अंतर और शिकायतों पर की गई कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा था।
हालांकि उदयन गुहा की गिरफ्तारी किन विशेष परिस्थितियों में की गई है, इस बारे में पुलिस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
