NEW DELHI
नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के समग्र विकास का विस्तृत विजन प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि मानव संसाधन, उद्योग, शिक्षा, कौशल और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा तभी सार्थक होगी, जब उसका लाभ राज्य की जनता तक पहुंचे और राज्य में ही संसाधनों का वैल्यू एडिशन हो। उन्होंने केंद्र सरकार से क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों के विकास, अनुसंधान एवं नवाचार केंद्रों की स्थापना तथा टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में बड़े निवेश को प्रोत्साहन देने का आग्रह किया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल को बताया विकास का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और अब इन विद्यालयों के छात्र IIT तथा मेडिकल संस्थानों में चयनित हो रहे हैं। राज्य सरकार 5000 उत्कृष्ट विद्यालय विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
उन्होंने केंद्र से झारखंड में पीएम श्री स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा NCERT का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग भी की।
हर साल एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। AI, इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और सौर ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को तैयार किया जा रहा है। साथ ही 53 हजार महिलाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर
हेमंत सोरेन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में लगातार कार्य हो रहा है। राज्य में 1276 दवा दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में UG और PG सीटों की संख्या बढ़ाने तथा लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देने की मांग उठाई। AI आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार करने की योजना का भी उल्लेख किया।
आंगनबाड़ी और पोषण अभियान की उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से लगभग 15 हजार के पास अपना भवन नहीं है, इसके बावजूद पोषण अभियान और SAAMAR कार्यक्रम के जरिए कुपोषण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बच्चों को प्रतिदिन अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण करा रही है।
कृषि, खेल और डिजिटल गवर्नेंस पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं तथा 1.5 लाख एकड़ क्षेत्र में फलदार पौधरोपण किया गया है। झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहा है। उन्होंने कृषि को कुपोषण के खिलाफ प्रभावी हथियार बताया।
खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के खिलाड़ी हॉकी, फुटबॉल और एथलेटिक्स में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की मांग की।
साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य AI आधारित सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर विकसित कर रहा है, जिससे शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
केंद्र के समक्ष रखीं कई अहम मांगें
बैठक में मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की शेष 6000 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये के भुगतान, DMFT मानकों में संशोधन, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने और स्कूली शिक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के एकीकरण की मांग उठाई।
उन्होंने PPP मोड में प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में शेष दो कॉलेजों को भी मंजूरी देने, झारखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी का अवसर प्रदान करने तथा DVC, CCL और ECL प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक आधारभूत संरचना निर्माण के लिए भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का आग्रह भी केंद्र सरकार से किया।
