मिडिल ईस्ट तनाव से सप्लाई पर असर
New Delhi
भारत का सेकेंडरी एल्युमीनियम उद्योग इस समय बड़ी चुनौती से गुजर रहा है। जो कंपनियां इंपोर्टेड स्क्रैप पर निर्भर हैं, उन्हें अब कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे उद्योग की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
उत्पादन में गिरावट और लागत में बढ़ोतरी
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कई कंपनियां अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं। कुछ जगहों पर उत्पादन में 20% से 40% तक की कमी आई है। वहीं, स्क्रैप की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ गया है और मुनाफा घट रहा है।
इंपोर्ट पर ज्यादा निर्भरता बनी समस्या
भारत अपने कुल एल्युमीनियम उत्पादन का बड़ा हिस्सा सेकेंडरी सेक्टर से बनाता है, जो पूरी तरह से आयातित स्क्रैप पर निर्भर है। यूरोपियन यूनियन, अमेरिका और मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में स्क्रैप आता है। लेकिन मौजूदा हालात में सप्लाई बाधित होने से कंपनियों के पास स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।
‘जैसे-तैसे काम’ की स्थिति में इंडस्ट्री
उद्योग के जानकारों का कहना है कि कई प्लांट्स अब ‘जैसे-तैसे काम चलाने’ की स्थिति में पहुंच गए हैं। अधिकांश कंपनियों के पास स्क्रैप का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जिससे आने वाले समय में उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बढ़ी लागत का बोझ कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
