RANCHI
झारखंड की राजनीति में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया आदिवासी, मूलवासी, पिछड़े और वंचित समुदायों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश बन सकती है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल कराया जाए और किसी भी योग्य मतदाता को छूटने न दिया जाए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान बताया।
SIR पर प्रशिक्षण और संगठन मजबूत करने पर जोर
कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में 12 जिलों के पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों ने भाग लिया। इस दौरान SIR और आगामी जनगणना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बदलते राजनीतिक हालात में कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। नगर और महानगर समितियों को भी अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
भाजपा की नीयत पर सवाल, अधिकार छीनने का आरोप
बैठक के दौरान झामुमो नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि SIR की आड़ में वंचित तबकों को मताधिकार से दूर करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही आशंका जताई गई कि इससे राशन कार्ड, पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।
पार्टी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि झामुमो का हर कार्यकर्ता जनहित और संगठन की मजबूती के लिए पूरी तत्परता से काम करेगा।
व्यापक भागीदारी के साथ बैठक संपन्न
बैठक में राज्य के कई जिलों के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। इसमें संगठन के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का संचालन महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने किया।
झामुमो ने साफ संकेत दिया है कि वह SIR को लेकर जमीनी स्तर पर सक्रिय अभियान चलाएगी और हर स्तर पर अपनी राजनीतिक और सामाजिक भूमिका को मजबूत करेगी।
