रांची के नन्हे रोजेदार की मिसाल: 8 साल के उमर अब्दुल्ला ने रखा रोजा, दिखाया सब्र

कम उम्र में बड़ा जज़्बा: क्लास 1 के छात्र ने निभाई इबादत, परिवार और मोहल्ले में गर्व का माहौल

RANCHI

रमज़ान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत और रोज़े के जरिए अल्लाह की बंदगी में लगे हुए हैं, वहीं रांची के एक नन्हे बच्चे ने अपनी इबादत और बरकत से सबका दिल जीत लिया है। 8 साल के उमर अब्दुल्ला ने कम उम्र में रोज़ा रखकर एक बेहतरीन मिसाल पेश किया है।

उमर अब्दुल्ला रांची के चर्च रोड स्थित संतुष्टि अपार्टमेंट में अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) रांची के क्लास 1 के स्टूडेंट हैं। इतनी छोटी उम्र में रोज़ा रखने का उनका जज़्बा न सिर्फ उनके परिवार बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी गर्व की बात बन गया है।

परिजनों के अनुसार, उमर ने खुद से रोज़ा रखने की इच्छा जताई थी। शुरुआत में परिवार ने उनकी उम्र को देखते हुए थोड़ा संकोच जताया, लेकिन बच्चे के उत्साह और दृढ़ संकल्प को देखते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया गया। रोज़ा के दौरान उमर पूरे दिन अनुशासन के साथ रहते हैं और इफ्तार के समय पूरे परिवार के साथ रोज़ा खोलते हैं।

रमज़ान के इस पवित्र महीने में रोज़ा रखना सिर्फ भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, धैर्य और इबादत का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में उमर जैसे छोटे बच्चों का इस परंपरा को अपनाना समाज में सकारात्मक संदेश देता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां बच्चे मोबाइल और टीवी में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, वहां उमर का यह कदम दूसरों के लिए भी मिसाल है। उनकी इस पहल से यह संदेश जाता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सीख बचपन से ही दी जाए तो बच्चे उसे पूरे मन से अपनाते हैं।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि उमर पढ़ाई के साथ-साथ नमाज़ और रोज़े को भी महत्व दे रहे हैं। इससे उनके अंदर अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है। रमज़ान के इस माहौल में उमर अब्दुल्ला का यह छोटा सा प्रयास एक बड़ी सीख देता है कि आस्था और समर्पण की कोई उम्र नहीं होती।

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