अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस: डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की चेतावनी, काम में बाधा बर्दाश्त नहीं
PATNA
बिहार में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार राजस्व सेवा के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस कदम के साथ ही उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निलंबित अधिकारियों में अररिया के अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जितेंद्र पांडे, पटना सदर के अंचलाधिकारी रजनीकांत और पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन अंचल के अंचलाधिकारी आनंद कुमार शामिल हैं। इन सभी पर कार्य में लापरवाही, निर्देशों की अनदेखी और अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप लगे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जो अधिकारी हड़ताल से वापस लौटकर काम में योगदान देंगे, उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन जो लोग सरकारी कार्य में बाधा डालेंगे, भ्रामक बयान देंगे या अनुशासन तोड़ेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम
विजय कुमार सिन्हा ने इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत राजस्व पदाधिकारी काम पर लौट चुके हैं। जिलाधिकारियों और अपर समाहर्ताओं से मिली रिपोर्ट के आधार पर यह स्थिति स्पष्ट हुई है। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सभी अधिकारियों का सक्रिय रहना जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब कई महत्वपूर्ण योजनाएं और अभियान चल रहे हैं।
जनगणना और अभियानों पर असर नहीं होने देने का प्रयास
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व विभाग के जिम्मे कई अहम कार्य हैं, जिनमें जनगणना की मॉनिटरिंग भी शामिल है। 17 अप्रैल से स्व-गणना का कार्य शुरू होना है, ऐसे में किसी भी प्रकार की बाधा से पूरे तंत्र पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने दोहराया कि सरकार के आदेशों की अवहेलना करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालना राज्यहित के खिलाफ है और इस पर सख्ती जरूरी है।
पूर्व अधिकारी के आचरण की भी होगी जांच
सरकार ने पूर्व राजस्व पदाधिकारी आदित्य शिवम शंकर के कार्यों और आचरण की जांच कराने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए एक त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति में महेंद्र पाल को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि मोना झा और नवाजिश अख्तर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ संकेत मिलता है कि बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
