इजरायली हमले में मारी गई “हिन्द रज़ब” को याद करते हुए नीतिशा खलखो की कविता
नीतिशा खलखो तुमने पुकारा था– उस इंसानी क़ौम को, जिसकी गोद में तुमने जन्म लिया था। तुम आई थीं इस…
नीतिशा खलखो तुमने पुकारा था– उस इंसानी क़ौम को, जिसकी गोद में तुमने जन्म लिया था। तुम आई थीं इस…
NITISHA KHAKHO सजाने से ज़्यादा अब ख़ुद को समेटने की कला सीखनी है मेरे अस्तित्व को। देह भर तक ही…