NEW DELHI
संसद की सियासत में उस वक्त नया उबाल आ गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने BJP पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि उसके हर छठे सांसद ने “वोट चोरी” के जरिए जीत हासिल की है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है और सत्ता पक्ष पर सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ कुछ सीटों की बात नहीं है, बल्कि कई जगहों पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर जनादेश को बदला गया है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में BJP के 240 सांसदों में से बड़ी संख्या ऐसे नेताओं की है, जिन्होंने कथित तौर पर वोटों में हेरफेर के जरिए जीत दर्ज की। उनके अनुसार, “कभी-कभी कुछ सीटें चुराई जाती हैं और कभी-कभी पूरी सरकार ही।”

अपने बयान को और धार देते हुए कांग्रेस नेता ने BJP की शब्दावली का ही इस्तेमाल करते हुए सवाल उठाया कि क्या ऐसे सांसदों को ‘घुसपैठिया’ कहा जाना चाहिए। उन्होंने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तो पूरी सरकार ही “घुसपैठिया” जैसी स्थिति में है। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि जिन संस्थाओं को निष्पक्ष होना चाहिए, वे “रिमोट-कंट्रोल्ड” हैं और उनका उपयोग वोटर लिस्ट तथा चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के लिए किया जा रहा है।
Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर देश में पूरी तरह निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं तो पार्टी की असली ताकत सामने आ जाएगी और वह 140 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि यही वजह है कि सत्ता पक्ष निष्पक्ष चुनाव से डरता है।
एक दिन पहले भी राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल और असम में BJP की हालिया चुनावी सफलताओं को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इन जीतों को जनता के जनादेश की “चोरी” करार देते हुए चेतावनी दी थी कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
राजनीतिक दलों को संदेश देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश और लोकतंत्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे छोटे राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों।
