RANCHI
झारखंड के पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने के आदेश के बावजूद अब तक पूरी कार्रवाई नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ सवाल किया कि जब पुलिस थानों में CCTV लगाने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है, तो उसका अनुपालन अब तक क्यों नहीं हुआ। मामले में चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य के डीजीपी को अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी पुलिस थानों में चार सप्ताह के भीतर CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा है कि थानों में CCTV लगाने की कार्रवाई को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि निर्धारित समयसीमा के भीतर इसका वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
30 सितंबर तक देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने की कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट 30 सितंबर तक अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं, मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अदालत के इस रुख से साफ है कि पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट अब किसी तरह की लापरवाही स्वीकार करने के मूड में नहीं है। कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है।
तरुण महतो की हिरासत में कथित पिटाई से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला JLKM के पूर्व इचागढ़ प्रत्याशी तरुण महतो को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर पीटे जाने के आरोप से जुड़ा है। 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले गई थी। आरोप है कि थाने में उनके साथ मारपीट की गई और थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया।
तरुण महतो की पत्नी की शिकायत के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं और थानों में CCTV की मौजूदगी को लेकर अदालत ने गंभीरता दिखाई थी।
सरायकेला एसपी से भी मांगी गई थी जानकारी
मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरायकेला एसपी से पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने को लेकर अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। अदालत यह भी जानना चाहती थी कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बाद CCTV लगाने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही कोर्ट ने उस मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा था, जिसने तरुण महतो को अदालत में पेश किए जाने के समय ‘फिट फॉर कस्टडी’ का प्रमाणपत्र दिया था।
अब DGP को जारी अवमानना नोटिस और चार सप्ताह में CCTV लगाने के निर्देश के बाद इस मामले में सरकार और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही बढ़ गई है। अगली सुनवाई में अदालत के सामने अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


