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देश के IITs में पिछले पांच वर्षों में 65 छात्रों की आत्महत्या के दावे ने एक बार फिर प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के मानसिक दबाव और संस्थागत सहायता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। IIT दिल्ली के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश की आत्महत्या के बाद 300 से अधिक छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन कर जवाबदेही और सिस्टम में बदलाव की मांग की।
दूसरे वर्ष के MSc Physics के छात्र ऋषिकेश ने शनिवार सुबह IIT दिल्ली कैंपस की छठी मंजिल से छलांग लगा दी थी। घटना के बाद छात्रों में भारी आक्रोश है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने इस त्रासदी को गंभीरता से लेने के बजाय सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखीं।
Cockroach Janta Party के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने मंगलवार को कहा कि 31 वर्षीय छात्र की मौत “पूरे देश के लिए खतरे की घंटी” होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली में तीन वर्षों में आठ छात्रों की आत्महत्या और पांच वर्षों में सभी IITs में 65 छात्रों की मौत का दावा एक स्पष्ट संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करता है।
रंका के मुताबिक, ऋषिकेश ने पिछले साल अपने पिता को खो दिया था और वह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे थे। उन्होंने दावा किया कि छात्र को हॉस्टल और काउंसलिंग जैसी जरूरी संस्थागत सहायता पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाई।
सोमवार को 300 से अधिक छात्र पहले लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के पास जुटे और बाद में निदेशक कार्यालय के बाहर पहली मंजिल की लॉबी तक पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्रों के मानसिक दबाव से निपटने के लिए संस्थागत सुधार की मांग की।
छात्रों का कहना है कि IIT जैसे संस्थानों में अकादमिक दबाव के साथ व्यक्तिगत और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे छात्रों के लिए प्रभावी सहायता व्यवस्था जरूरी है। उनका सवाल है कि यदि किसी छात्र को समय रहते पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा है, तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान की मौजूदा व्यवस्था कितनी कारगर है।


