गिरिडीह सांसद ने संसद में उठाया पेंडिंग छात्रवृत्ति का मुद्दा, राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

छात्रों के अधिकारों से समझौता नहीं, योजनाओं की राशि रोके जाने पर उठे गंभीर सवाल


RANCHI

झारखंड के छात्र–छात्राओं की छात्रवृत्ति से जुड़े गंभीर मुद्दे को गिरिडीह से आजसू पार्टी के सांसद चंद्रप्रकाश ने लोकसभा में नियम 377 के तहत उठाया। उन्होंने बताया कि इस विषय पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा 16 फरवरी 2026 को दिए गए उत्तर में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक हैं। सांसद ने कहा कि यह विषय केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों वंचित, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (2022-23 से 2024-25)

केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार कई वित्तीय वर्षों में झारखंड सरकार की ओर से समुचित मांग प्रस्तुत नहीं की गई। कुछ मामलों में पूर्व में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) समय पर नहीं भेजा गया, जिसके कारण अगली किस्तों का निर्गमन बाधित रहा।

विशेष रूप से ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी वर्ग के लिए वर्ष 2021-22 में जारी 52.15 करोड़ रुपये के विरुद्ध उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया। यह प्रमाणपत्र बाद में 29 दिसंबर 2023 को जमा किया गया। सांसद के अनुसार यह स्पष्ट संकेत है कि समस्या केंद्र स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य स्तर की प्रक्रियात्मक लापरवाही में रही है।

प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की स्थिति

वर्ष 2022-23 और 2023-24 में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए राज्य सरकार द्वारा डेटा रिपोर्ट नहीं किया गया। कई वर्षों में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार के पास पहले से जारी राशि शेष थी या औपचारिक मांग प्रस्तुत नहीं की गई। सांसद ने प्रश्न उठाया कि जब राज्य सरकार समय पर डेटा और मांग नहीं भेजेगी तो छात्रवृत्ति की राशि कैसे जारी की जाएगी।

श्रेयस (एससी) एवं उच्च शिक्षा योजनाएँ

अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित योजनाएं जैसे टॉप क्लास एजुकेशन, राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति, राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति और फ्री कोचिंग योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता से संचालित होती हैं। इन योजनाओं में राज्य अंश का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद झारखंड से लाभार्थियों की संख्या अत्यंत सीमित रही है। सांसद ने इसे राज्य स्तर पर जागरूकता, क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग में कमी का परिणाम बताया।

ओबीसी छात्रों के लिए योजनाओं की स्थिति

विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की टॉप क्लास योजनाओं में लाभार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है। वर्ष 2023-24 से लागू महाविद्यालय स्तरीय योजना में भी संभावित लाभार्थियों की तुलना में वास्तविक संख्या काफी कम पाई गई है।

सांसद चंद्रप्रकाश ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार योजनाएं संचालित कर रही है और कई मामलों में राशि भी जारी की गई, लेकिन राज्य सरकार द्वारा समय पर मांग प्रस्तुत नहीं की गई। उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजने में देरी हुई और डेटा रिपोर्टिंग में गंभीर कमी रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के उदासीन रवैये और प्रशासनिक लापरवाही का सीधा खामियाजा गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि जब छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति के अभाव में पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हों और अभिभावक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हों, तो क्या समय पर कागजी प्रक्रिया पूरी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?

सांसद ने स्पष्ट कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी का प्रश्न है। झारखंड के छात्रों का अधिकार उन्हें हर हाल में मिलना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि छात्रों के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा और केंद्र से मिलने वाली हर वैध राशि विद्यार्थियों तक पहुंचे, इसके लिए वे निरंतर प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी वर्ग विशेष की सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे का अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा के लिए वे सदैव प्रतिबद्ध हैं।

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