ईको टूरिज्म के नाम पर पेड़ कटाई का आरोप, 206 करोड़ खर्च का हिसाब मांगा
Seraikela
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र स्थित दलमा पहाड़ की तराई में 135 गांव और 84 मौजा के ग्रामीणों ने ईको टूरिज्म परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य का विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के कार्य कराया जा रहा है, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
ग्रामीण ‘जल, जंगल, जमीन पर हमारा अधिकार’ और ‘हमारा जमीन, हमारा अधिकार’ जैसे नारों के साथ महा जनसभा स्थल पर जुटे। उनका कहना है कि 29 मार्च 2012 को दलमा को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था, लेकिन अब ईको टूरिज्म के नाम पर पेड़ों की कटाई की जा रही है।
206 करोड़ रुपये के उपयोग पर सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा स्वीकृत 206 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसे लेकर पारदर्शिता की मांग की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वन विभाग मनमाने ढंग से बिना ग्राम सभा की सहमति के कार्य कर रहा है। उनका दावा है कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोई भी परियोजना लागू करना उनके संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने इस मुद्दे पर ठोस निर्णय नहीं लिया और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
