मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया में 60 बच्चों को मिले स्वेटर, सेवा और सम्मान के साथ सर्दी से राहत
Ranchi
दिसंबर की तीखी ठंड जब आम लोगों को घरों में सिमटने पर मजबूर कर रही थी, उसी समय कोकदोरो में संवेदना और जिम्मेदारी की एक शांत लेकिन असरदार तस्वीर सामने आई। मौलाना आज़ाद ह्यूमेन इनिशिएटिव (माही) ने मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया, कोकदोरो परिसर में 60 जरूरतमंद बच्चों को सर्दी से राहत पहुंचाते हुए उन्हें स्वेटर वितरित किए। इन बच्चों के लिए यह केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि ठंड से बचाव और सुरक्षा का सहारा था।
बिना किसी तामझाम के आयोजित इस कार्यक्रम में सेवा और सम्मान की भावना साफ दिखाई दी। बच्चों के चेहरों पर उभरी मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि यह पहल उनके लिए कितनी मायने रखती है। यह आयोजन सिर्फ राहत वितरण नहीं, बल्कि भरोसे और मानवीय जुड़ाव का संदेश भी था।

यह गतिविधि मौलाना आज़ाद की स्मृति में संचालित माही के शीतकालीन अभियान “कोल्ड इज़ बोल्ड, एन इनिशिएटिव बाय माही” का हिस्सा है। यह अभियान हर वर्ष मौलाना आज़ाद डे के अवसर पर सर्दियों की शुरुआत के साथ शुरू किया जाता है और नवंबर से दिसंबर तक चलता है। इसका उद्देश्य उन बच्चों तक मदद पहुंचाना है, जो आर्थिक अभाव के कारण ठंड के मौसम में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
माही के संयोजक और वक्फ बोर्ड के संयोजक इबरार अहमद ने इस मौके पर कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती। ठंड, भूख और असुरक्षा जैसी स्थितियाँ उनकी सीखने की क्षमता को सीधे प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा, “जब तक बच्चा सुरक्षित और सहज महसूस नहीं करेगा, तब तक उसकी सीखने की क्षमता भी प्रभावित रहेगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माही की सोच दान की नहीं, बल्कि सामाजिक कर्तव्य की है, जहां मदद आत्मसम्मान के साथ की जाती है, न कि एहसान के रूप में।
मदरसा के मुफ्ती उमर फारूक ने इस पहल को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में मानवीय मूल्यों को जीवित रखते हैं। उनके अनुसार, लगातार ठंड के मौसम में जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचना माही की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इससे बच्चों में सुरक्षा और आत्मबल की भावना विकसित होती है।
मदरसा प्रबंधन ने भी इस सहयोग के लिए माही का आभार जताया और इसे समाज के लिए प्रेरणादायी कदम बताया।
इस अवसर पर हाजी खतीबुल हक, मुफ्ती शाहिद, मुफ्ती मोजम्मिल, मौलाना गुलफाम, मौलाना सद्दाम, मौलाना काशिफ, मोहम्मद अफरोज, कांके जिला परिषद सदस्य जमील अख्तर, माही के उपाध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह, अशफाक बब्लू, शाहिद अख्तर टुकलु, वसीम अकरम, शम्सु खान, मोहम्मद नजीब सहित कई लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में माही की ओर से यह संदेश दोहराया गया कि संस्था आगे भी उन इलाकों और उन बच्चों तक पहुंचने का प्रयास जारी रखेगी, जहां मौसम की मार और संसाधनों की कमी उनके सपनों को ठंडा कर देती है—क्योंकि इंसानियत की असली पहचान सबसे पहले सबसे जरूरतमंद तक पहुंचना है।
