Ranchi/New Delhi
झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती-2015 में चयन प्रक्रिया के कई चरण पूरे करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रह गए अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और नियुक्ति-पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने की। अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम, AOR वात्सल्य विज्ञा और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
छह याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों ने झारखंड सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में छह अलग-अलग विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दायर की थीं। अदालत ने इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
इनमें जितेंद्र कुमार शर्मा व अन्य की SLP (C) No. 1359/2023, महताब खान व अन्य की SLP (C) No. 3950/2023, विष्णु कांत पांडेय व अन्य की SLP (C) No. 3964/2023, प्रकाश कुमार पांडेय व अन्य की SLP (C) No. 16380/2023, मिथिलेश कुमार महतो व अन्य की SLP (C) No. 16379/2023 और विशाल कुमार व अन्य की SLP (C) No. 16946/2023 शामिल हैं।
7,272 पदों की भर्ती, 2,380 पद रह गए थे खाली
पूरा मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से जारी विज्ञापन संख्या 04/2015 से जुड़ा है। इसके तहत झारखंड पुलिस में 7,272 सिपाही पदों पर भर्ती निकाली गई थी।
अभ्यर्थियों का कहना था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2,380 पद रिक्त रह गए। इनमें 1,168 महिला और 1,212 अन्य श्रेणी के पद शामिल थे।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा, मेडिकल जांच और दस्तावेज सत्यापन तक की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। इसके बावजूद दूसरी मेरिट लिस्ट जारी नहीं की गई और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नियुक्ति से बाहर रह गए।
437 अभ्यर्थियों ने दी शारीरिक सहनशक्ति परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट के 3 जून 2026 के आदेश के अनुपालन में 437 अभ्यर्थियों ने 20 अगस्त 2026 को शारीरिक सहनशक्ति परीक्षा (Physical Endurance Test) में हिस्सा लिया।
इसके अलावा करीब 125 अभ्यर्थियों की सूची भी तैयार की जा रही थी, जिन्हें 21 अगस्त को परीक्षा में शामिल होना था। इस दौरान अदालत ने कहा कि 31 जुलाई 2026 के पत्र में तय किए गए मानदंड 3 जून के आदेश के अनुरूप नहीं हैं।
अदालत ने ऐसे सभी संबंधित अभ्यर्थियों को पूरी तरह उत्तीर्ण मानने का निर्देश दिया। इसके बाद अब पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
करीब 300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मामला भी उठा
सुनवाई के दौरान करीब 300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिक्त पद उपलब्ध हैं और इन अभ्यर्थियों ने संतोषजनक सेवा दी है, इसलिए उन्हें भी समायोजित किए जाने पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि उनकी प्रारंभिक चयन प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और उन्हें दोबारा लिखित परीक्षा में शामिल कराने का कोई औचित्य नहीं है।
सरकार को चार सप्ताह की समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे पात्र अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार को दस्तावेज सत्यापन समेत जरूरी प्रक्रिया पूरी कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति-पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका यह आदेश केवल मौजूदा याचिकाकर्ताओं तक सीमित रहेगा। यह फैसला मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे बाध्यकारी नजीर (Binding Precedent) नहीं माना जाएगा।
इन निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने सभी छह SLP और उनसे जुड़े लंबित आवेदनों का निस्तारण कर दिया।


