NEW DELHI
आखिरकार 2024-25 के लिए PM CARES Fund का ऑडिट स्टेटमेंट सार्वजनिक कर दिया गया है। ऑडिट से सामने आए आंकड़ों ने फंड में जमा बड़ी रकम और उसके इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि उपलब्ध ₹8,452 करोड़ की राशि में से सिर्फ 0.01 फीसदी का ही इस्तेमाल किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नागरिकों की मदद के लिए बनाए गए इस फंड में इतनी बड़ी रकम आखिर क्यों पड़ी हुई है?

ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक, कार्यान्वयन एजेंसियों की ओर से ₹324 करोड़ की राशि वापस की गई है। लेकिन इन रिफंड को लेकर जरूरी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि ये भुगतान किस काम के लिए किए गए थे, रकम किस-किस एजेंसी ने वापस की और इसे वापस करने की वजह क्या थी।
यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं इन रिफंड का संबंध खराब या विवादित उपकरणों से तो नहीं था? क्या किसी एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए रकम वापस की? इन सवालों का जवाब तभी स्पष्ट हो सकता है, जब रिफंड से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
ऑडिट स्टेटमेंट आया, लेकिन जरूरी नोट्स अब भी गायब
PM CARES Fund के ऑडिट स्टेटमेंट के सार्वजनिक होने के बावजूद सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के साथ जुड़े accompanying notes अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इन नोट्स के बिना ऑडिट में दर्ज कई आंकड़ों का पूरा संदर्भ और उनके पीछे की जानकारी समझना मुश्किल है। खास तौर पर ₹324 करोड़ के रिफंड को लेकर यह जानना जरूरी है कि रकम किन परियोजनाओं या भुगतान से जुड़ी थी और किन परिस्थितियों में इसे वापस किया गया।
हजारों करोड़ का फंड, फिर भी पारदर्शिता पर सवाल
PM CARES Fund का गठन आपदा और संकट के समय नागरिकों की मदद के उद्देश्य से किया गया था। समय के साथ इस फंड में हजारों करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इनमें विदेशी स्रोतों से प्राप्त राशि भी शामिल होने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद फंड में पैसा किन स्रोतों से आया, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
PM CARES Fund को लेकर RTI के सवाल भी लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि फंड खुद को RTI Act के दायरे में लाकर सार्वजनिक जांच के लिए पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराता।
अब 2024-25 का ऑडिट स्टेटमेंट सार्वजनिक होने के बाद बहस फिर तेज हो गई है। ₹8,452 करोड़ की उपलब्ध राशि में सिर्फ 0.01 फीसदी इस्तेमाल और ₹324 करोड़ के रिफंड पर अधूरी जानकारी ने पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
सवाल सीधा है—जब यह फंड नागरिकों की मदद के लिए बनाया गया है, तो हजारों करोड़ रुपये की इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया और फंड से जुड़े जरूरी वित्तीय विवरण अब भी पूरी तरह सार्वजनिक क्यों नहीं हैं?
