चतरा: JSSC-CGL मामले में BSO तेजनारायण पंडित हिरासत में, PGT परीक्षा को लेकर भी उठे सवाल

RANCHI

JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में चतरा जिले के पत्थलगड्डा प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) तेजनारायण पंडित को हिरासत में लिया गया है। उनसे परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां इस मामले में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका और संभावित कड़ियों को खंगाल रही हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को JSSC-CGL समेत TDPL द्वारा संचालित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रोजेक्ट भवन में कैबिनेट की करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद मीडिया को सरकार के इस फैसले की जानकारी दी थी।

बैठक में परीक्षाओं को रद्द करने से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई। इसके बाद सरकार ने JSSC-CGL सहित TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया।

CGL के बाद अब PGT परीक्षा भी सवालों के घेरे में

JSSC-CGL विवाद के बीच अब JSSC PGT परीक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जिस TDPL एजेंसी के जरिए PGT परीक्षा आयोजित कराई गई थी, उसे लेकर सामने आ रहे सवालों के बाद अभ्यर्थियों की नजर अब जांच की दिशा पर टिकी है।

हजारीबाग से इस मामले में सुनील कुमार शर्मा का नाम चर्चा में आया है। बताया जा रहा है कि वह दारू प्रखंड के दिगवार स्कूल में कार्यरत हैं और हजारीबाग के कोर्रा चौक में कॉमर्स पढ़ाते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह 4 तारीख से 27 तारीख तक मेडिकल लीव पर हैं।

इसी मामले में दूसरा नाम मनोज शर्मा का सामने आ रहा है, जो गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड के रहने वाले बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि सुनील कुमार शर्मा और मनोज शर्मा आपस में रिश्तेदार हैं। हालांकि, इन दावों और दोनों की भूमिका को लेकर जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

परीक्षा रद्द होने के बाद जांच पर टिकी नजर

सरकार के स्तर पर JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद अब पूरे मामले की जांच को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। छात्रों और अभ्यर्थियों की ओर से लगातार मांग उठ रही है कि कथित गड़बड़ी की तह तक पहुंचने के लिए निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराई जाए।

विभिन्न मंचों से अब CBI जांच की मांग भी उठाई जा रही है। हालांकि, इस मांग के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि झारखंड में पहले से CBI को सौंपे गए कई मामलों की जांच का परिणाम क्या रहा है। जानकारों का कहना है कि केवल जांच एजेंसी बदलने से अधिक जरूरी यह है कि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषियों तक कार्रवाई पहुंचे।

फिलहाल JSSC-CGL मामले में BSO तेजनारायण पंडित से पूछताछ और TDPL से जुड़ी अन्य परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित गड़बड़ी की कड़ियां कहां तक जुड़ी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *