NEW DELHI
देशभर में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बढ़ते आंदोलन के बीच अब मोदी सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर भी सख्त रुख अपना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और युवाओं को संबोधित वीडियो फेसबुक से कुछ घंटों के लिए हटाए जाने के मामले में संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग को 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है। समिति ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय में माफी नहीं मांगने पर आईटी एक्ट के तहत मिली कानूनी सुरक्षा (इम्युनिटी) वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का वह वीडियो, जिसमें उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े विवादों पर युवाओं को संबोधित किया था, फेसबुक से पांच से छह घंटे तक हटाए जाने को बेहद गंभीरता से लिया गया है। समिति का मानना है कि इस तरह की घटना सिर्फ तकनीकी चूक मानकर नहीं छोड़ी जा सकती।
समिति की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यदि मार्क ज़करबर्ग तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी नहीं मांगते हैं तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मेटा को मिली सुरक्षा समाप्त कर उसे एक प्रकाशक (Publisher) के रूप में कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकता है।
बैठक के दौरान संसदीय समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। समिति ने स्पष्ट कहा कि ऐसे कंटेंट को समय पर नहीं हटाने वाले इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ भी आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके अलावा फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए निवेशकों के करोड़ों रुपये की ठगी के मामलों को लेकर गूगल इंडिया के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। समिति का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को केवल तकनीकी मंच नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों का भी पूरी तरह निर्वहन करना होगा।
यह घटनाक्रम सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की उस बैठक के दो दिन बाद सामने आया है, जिसमें गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के साथ-साथ मेटा, गूगल, एक्स (X), स्नैपचैट और यूट्यूब सहित प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने बैठक के बाद कहा कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक फेसबुक पोस्ट को हटाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि देश के प्रधानमंत्री की आधिकारिक पोस्ट के साथ ऐसा हो सकता है तो आम नागरिकों की पोस्ट कितनी सुरक्षित होगी, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को केवल तकनीकी खराबी बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, अमेरिका स्थित मेटा ने इस घटना को तकनीकी त्रुटि बताते हुए कहा है कि वीडियो गलती से हट गया था और बाद में उसे दोबारा बहाल कर दिया गया। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी के इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना है।
