New Delhi/Puri
पुरी की परंपरागत रथ यात्रा तिथियों से अलग आयोजन करने को लेकर ISKCON के खिलाफ ओडिया समाज का गुस्सा खुलकर सामने आया है। ओडिशा फोरम ने इसे सदियों पुरानी जगन्नाथ संस्कृति और धार्मिक मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में फोरम के प्रतिनिधियों ने कहा कि पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर द्वारा निर्धारित तिथियों से इतर रथ यात्रा मनाना केवल कैलेंडर का विवाद नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और आस्था के सम्मान का प्रश्न है। उनका कहना है कि सुविधा के नाम पर परंपराओं में बदलाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी है रथ यात्रा की समय-सारिणी
ओडिशा फोरम ने स्पष्ट किया कि रथ यात्रा की तिथियां ऐतिहासिक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रीय परंपराओं से निर्धारित होती हैं। इनसे किसी भी प्रकार का विचलन जगन्नाथ संस्कृति की मूल आत्मा को कमजोर करता है। फोरम अध्यक्ष गोकुल पटनायक ने दुनिया भर के ओडिया समुदाय से इस विरासत की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।
राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा ज्ञापन
फोरम ने घोषणा की कि वह इस मुद्दे को उच्च प्रशासनिक स्तर पर उठाएगा और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपेगा। साथ ही केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए रथ यात्रा को UNESCO की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में शामिल कराने की पहल तेज करने का आग्रह करेगा। गोकुल पटनायक ने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति केवल ओडिशा की नहीं, बल्कि भारत की साझा आध्यात्मिक धरोहर है, जिसकी परंपरागत व्यवस्था और पवित्रता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
