NEW DELHI
रांची के 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत एक बार फिर चर्चा में हैं। CBSE की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित टेंडर अनियमितताओं को उजागर करने के बाद अब उन्होंने सरकारी खरीद और टेंडरों से जुड़ी करीब 1.66 करोड़ फाइलों को एक मंच पर उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट तैयार की है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक वित्तीय प्रक्रियाओं को आम नागरिकों के लिए अधिक पारदर्शी बनाना बताया गया है।
सार्थक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि पारदर्शिता सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। उनके अनुसार, यह डेटा सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल (CPPP) से लिया गया है, जिसमें देशभर के टेंडरों, बोलियों और कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित सूचनाएं दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा इसी प्रक्रिया के माध्यम से होता है और इसे सार्वजनिक निगरानी के दायरे में होना चाहिए।
दो सप्ताह में तैयार किया हाई-थ्रूपुट सिस्टम
सार्थक ने बताया कि उन्होंने लगभग दो सप्ताह की मेहनत से एक हाई-थ्रूपुट स्क्रैपर विकसित किया, जिसने CPP पोर्टल के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से संग्रहित और संरक्षित किया। इसके परिणामस्वरूप दो बड़े SQLite डेटाबेस तैयार हुए, जिनमें 88 लाख से अधिक संरचित रिकॉर्ड मौजूद हैं। इनमें शुरुआती टेंडर नोटिस से लेकर अंतिम आवंटन परिणाम तक की विस्तृत जानकारी शामिल है।
शोधकर्ताओं और नागरिकों के लिए खुला मंच
उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं, डेटा वैज्ञानिकों, वकीलों, निवेशकों, ठेकेदारों और आम नागरिकों के लिए एक खुला संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। उनका मानना है कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली को समझने और उसकी निगरानी करने में यह पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
CBSE टेंडर मामले से मिली थी पहचान
सार्थक इससे पहले उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़े ठेके को लेकर सवाल उठाए थे। उनके खुलासों के बाद इस मामले पर व्यापक चर्चा हुई और बाद में बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का उनके मूल कैडर में तबादला कर दिया गया।
रांची के छात्र शुभम ने बनाया देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक टेंडर डेटा पोर्टल, 1.66 करोड़ सरकारी फाइलें उपलब्ध
sarthak-siddhant-public-procurement-data-platform
transparency, procurement, database, technology, governance,
NEW DELHI
रांची के 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत एक बार फिर चर्चा में हैं। CBSE की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित टेंडर अनियमितताओं को उजागर करने के बाद अब उन्होंने सरकारी खरीद और टेंडरों से जुड़ी करीब 1.66 करोड़ फाइलों को एक मंच पर उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट तैयार की है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक वित्तीय प्रक्रियाओं को आम नागरिकों के लिए अधिक पारदर्शी बनाना बताया गया है।
सार्थक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि पारदर्शिता सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। उनके अनुसार, यह डेटा सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल (CPPP) से लिया गया है, जिसमें देशभर के टेंडरों, बोलियों और कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित सूचनाएं दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा इसी प्रक्रिया के माध्यम से होता है और इसे सार्वजनिक निगरानी के दायरे में होना चाहिए।
दो सप्ताह में तैयार किया हाई-थ्रूपुट सिस्टम
सार्थक ने बताया कि उन्होंने लगभग दो सप्ताह की मेहनत से एक हाई-थ्रूपुट स्क्रैपर विकसित किया, जिसने CPP पोर्टल के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से संग्रहित और संरक्षित किया। इसके परिणामस्वरूप दो बड़े SQLite डेटाबेस तैयार हुए, जिनमें 88 लाख से अधिक संरचित रिकॉर्ड मौजूद हैं। इनमें शुरुआती टेंडर नोटिस से लेकर अंतिम आवंटन परिणाम तक की विस्तृत जानकारी शामिल है।
शोधकर्ताओं और नागरिकों के लिए खुला मंच
उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं, डेटा वैज्ञानिकों, वकीलों, निवेशकों, ठेकेदारों और आम नागरिकों के लिए एक खुला संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। उनका मानना है कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली को समझने और उसकी निगरानी करने में यह पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
CBSE टेंडर मामले से मिली थी पहचान
सार्थक इससे पहले उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़े ठेके को लेकर सवाल उठाए थे। उनके खुलासों के बाद इस मामले पर व्यापक चर्चा हुई और बाद में बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का उनके मूल कैडर में तबादला कर दिया गया।
