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मलकानगिरी को सरकार भले ही तय समयसीमा के भीतर नक्सल-मुक्त घोषित कर चुकी हो, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं करती। रविवार को कालीमेला थाना क्षेत्र के गुंटाबेड़ा और कदमगुडा के जंगलों से हथियारों, विस्फोटकों और गोला-बारूद का बड़ा ज़खीरा बरामद होने के बाद नक्सल नेटवर्क के बचे-खुचे ढांचे को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
सुरक्षा बलों का मानना है कि सक्रिय गतिविधियां कम होने के बावजूद माओवादी संगठनों ने भविष्य के इस्तेमाल के लिए जंगलों में गुप्त हथियार भंडार तैयार कर रखे थे। जिला स्वयंसेवी बल (DVF) ने खुफिया सूचनाओं और आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर यह अभियान चलाया, जिसमें अत्याधुनिक हथियार और 37 प्रकार की विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
बरामद सामान में दो SLR, दो देसी पिस्तौल, IED, क्लेमोर माइन, BGL लॉन्चर, ग्रेनेड, लैंडमाइन और हथियार निर्माण से जुड़े उपकरण शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि इन हथियारों को भविष्य में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और अभियानों में बाधा पहुंचाने के उद्देश्य से घने जंगलों में छिपाकर रखा गया था।
मलकानगिरी के एसपी विनोद पाटिल एच ने बताया कि जून महीने में यह तीसरी बड़ी बरामदगी है। इससे पहले 9 और 15 जून को भी माओवादियों के दो अन्य हथियार डंप पकड़े गए थे। उन्होंने कहा कि 31 मार्च की समयसीमा के अनुसार जिला नक्सल-मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित ठिकानों की तलाश लगातार जारी है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन लगातार बरामदगियों से नक्सलियों की बची-खुची ऑपरेशनल क्षमता कमजोर होगी, वहीं यह भी स्पष्ट होता है कि नक्सल-मुक्ति की घोषणा के बाद भी जंगलों में छिपे नेटवर्क और हथियारों के पूरी तरह सफाए की चुनौती अभी बाकी है।
