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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। SIR के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों की अपीलों पर सुनवाई की रफ्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अब तक के कामकाज का पूरा हिसाब मांगा है। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल अपील दाखिल हो जाना पर्याप्त नहीं है, यह भी देखना जरूरी है कि उन अपीलों पर फैसला कितनी तेजी से हो रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि SIR के खिलाफ बनाए गए अपीलीय ट्रिब्यूनलों में अब तक कितने मामले पहुंचे, कितने मामलों का निपटारा हुआ और कितने अभी लंबित हैं। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
SC ने कहा- सिर्फ अपील नहीं, फैसला भी दिखना चाहिए
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ट्रिब्यूनलों के कामकाज की रफ्तार पर फोकस किया। चौधरी ने SIR से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने की मांग की है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि अदालत का मुख्य सवाल यह है कि अब तक कितने मामलों का निपटारा हुआ है। उनका कहना था कि सिर्फ यह बताना काफी नहीं है कि लोगों ने अपील दाखिल कर दी है। यह भी जरूरी है कि उन अपीलों पर वास्तव में क्या कार्रवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से राज्य के अपीलीय ट्रिब्यूनलों में निपटाए गए और लंबित मामलों की पूरी जानकारी देने को कहा है।
SIR से नाम हटे तो राशन का लाभ क्यों रुके?
सुनवाई के दौरान अधीर रंजन चौधरी के वकील ने SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए लोगों को PDS यानी राशन व्यवस्था का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया।
वकील की दलील थी कि जब तक किसी व्यक्ति की अपील पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उसे राशन जैसी सरकारी सुविधा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को मौजूदा याचिका में शामिल करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने और PDS का लाभ रोकने के मामले अलग-अलग हैं। PDS से जुड़ी शिकायत कलकत्ता हाईकोर्ट में अलग से उठाई जानी चाहिए।
ट्रिब्यूनलों की व्यवस्था पर भी SC ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत की ओर भी इशारा किया। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए जजों तक पहुंच और दूसरी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल उसका सबसे बड़ा सवाल ट्रिब्यूनलों की निपटारे की क्षमता और रफ्तार को लेकर है। यानी कितने मामले आए और उनमें से कितने मामलों पर फैसला हुआ।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने मामले को 25 अगस्त को इसी तरह के दूसरे मामलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की है।
मार्च में SC ने दिए थे ट्रिब्यूनल बनाने के आदेश
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 10 मार्च को पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों के खिलाफ अपील सुनने के लिए स्वतंत्र अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया था। इन ट्रिब्यूनलों की अध्यक्षता हाईकोर्ट के पूर्व जजों को करनी है।
अदालत ने SIR से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल के अलावा ओडिशा और झारखंड के ट्रायल कोर्ट के जजों की सेवाएं लेने की भी अनुमति दी थी।
पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई है। इस दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप भी लगे। अब सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि जिन लोगों ने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की है, उनकी सुनवाई और फैसले की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है।
